नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया। इसमें शांतिपूर्ण समाधान, वैश्विक शासन सुधार और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर विशेष बल दिया गया है।
- नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया, जिसमें विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया।
- भारत की अध्यक्षता चार स्तंभों: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित है।
- ग्लोबल साउथ की समस्याओं और वैश्विक शासन सुधारों को प्राथमिकता दी गई।
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'नई दिल्ली संयुक्त घोषणापत्र' को अपनाया है। यह घोषणापत्र अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, कूटनीति और संघर्ष रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य राष्ट्रों ने बहुपक्षवाद और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के पालन की वकालत की, ताकि एकतरफा टैरिफ बाधाओं को रोका जा सके।
भारत की अध्यक्षता के दौरान, प्रधानमंत्री ने विस्तारित ब्रिक्स परिवार का स्वागत किया और भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की अध्यक्षता चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है: लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation), और स्थिरता (Sustainability)। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स के भीतर विकसित किए गए समाधान न केवल प्रभावी होने चाहिए, बल्कि वे 'ग्लोबल साउथ' के लिए भी सुलभ और अनुकूल होने चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स का विस्तार और नई दिल्ली घोषणापत्र वैश्विक भू-राजनीति में शक्ति के संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है। जैसे-जैसे यह समूह अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है, दुनिया अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस परिणामों की अपेक्षा कर रही है। यह शिखर सम्मेलन डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने का एक मंच बन गया है।
ब्रिक्स का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह सदस्य देश आपसी विश्वास और आर्थिक एकीकरण के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं।
शिखर सम्मेलन के दौरान 30 शहरों में 350 से अधिक जुड़ाव किए गए, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और आपदा लचीलेपन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 50 से अधिक महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त हुए। नेताओं ने वैश्विक शासन सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वर्तमान वास्तविकताओं के अनुरूप कार्य कर सकें।
Historical Background
ब्रिक्स (BRICS) का गठन उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। समय के साथ, इसमें नए सदस्यों के जुड़ने से इसकी प्रासंगिकता और व्यापकता बढ़ गई है, जिससे यह अब केवल एक आर्थिक ब्लॉक नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बन गया है।
Frequently Asked Questions
1. नई दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
2. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मुख्य स्तंभ क्या हैं?
भारत की अध्यक्षता लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित है।