नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान, सदस्य देशों के नेताओं ने परमाणु हथियारों के बढ़ते जोखिम और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों के प्रति गंभीर चेतावनी जारी की है। 'नई दिल्ली घोषणापत्र' के माध्यम से वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

  • BRICS नेताओं ने परमाणु सुरक्षा और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों के खिलाफ चेतावनी दी।
  • 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को सर्वसम्मति से अपनाया गया।
  • परमाणु निशस्त्रीकरण और हथियारों के नियंत्रण को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान, दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने परमाणु युद्ध के बढ़ते जोखिमों पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। 12 सितंबर, 2026 को अपनाया गया 'नई दिल्ली घोषणापत्र' वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर उभरा है।

सम्मेलन के दौरान, नेताओं ने विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा उपायों के तहत आने वाली नागरिक बुनियादी संरचनाओं और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर 'जानबूझकर किए गए हमलों' की निंदा की। घोषणापत्र में स्पष्ट किया गया कि सशस्त्र संघर्षों के दौरान भी परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि मानवता और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति से बचाया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घोषणापत्र वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। हालांकि घोषणापत्र में अमेरिका या ईरान के बीच सीधे संघर्षों का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन यह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और परमाणु जोखिमों की ओर स्पष्ट इशारा करता है। भारत के लिए, यह शिखर सम्मेलन एक बड़ी कूटनीतिक जीत है क्योंकि उसने यूएई और ईरान के बीच मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मति बनाने में सफलता प्राप्त की है।

परमाणु सुरक्षा केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि वैश्विक अस्तित्व के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए। नेताओं ने 'परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों' (Nuclear-weapon-free zones) के महत्व को भी दोहराया और मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयासों का समर्थन किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BRICS, जो मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह था, 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद अब एक विशाल वैश्विक शक्ति बन गया है। इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हो चुके हैं, जो इसे वैश्विक दक्षिण (Global South) की सबसे शक्तिशाली आवाज बनाता है।

Did You Know?: BRICS अब दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

1. नई दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य परमाणु संघर्ष के जोखिमों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

2. क्या BRICS में नए देश शामिल हुए हैं?
हाँ, हाल के वर्षों में मिस्र, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देशों ने इस समूह की शक्ति को बढ़ाया है।