नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने नागरिक परमाणु सुविधाओं पर हमलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने लचीलेपन, नवाचार और स्थिरता पर जोर दिया, जबकि आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई गई।

  • ब्रिक्स देशों ने नागरिक परमाणु बुनियादी ढांचे पर हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया।
  • पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का आह्वान किया गया।

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान, सदस्य राष्ट्रों ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ चिह्नित किया है। शिखर सम्मेलन में एक सर्वसम्मत स्वर में नागरिक परमाणु सुविधाओं पर होने वाले संभावित हमलों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की गई। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में भारत की रणनीतिक दृष्टि को स्पष्ट करते हुए चार मुख्य स्तंभों पर जोर दिया: लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation), और स्थिरता (Sustainability)। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को केवल एक आर्थिक ब्लॉक के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक सुरक्षा और विकास के इंजन के रूप में कार्य करना चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा पर ब्रिक्स का यह रुख भविष्य के भू-राजनीतिक संघर्षों में एक महत्वपूर्ण मानक स्थापित कर सकता है। नागरिक परमाणु केंद्रों को निशाना बनाना न केवल एक मानवीय आपदा है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए भी एक गंभीर खतरा है।

नागरिक परमाणु बुनियादी ढांचे की सुरक्षा अब केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन गई है।

शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जो भारत के आतंकवाद के प्रति सख्त रुख को दर्शाता है। 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में स्पष्ट रूप से सीमा पार आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहिष्णुता) की नीति अपनाने का आह्वान किया गया है, जिससे वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्रिक्स (BRICS) का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग के लिए किया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2026 के इस शिखर सम्मेलन में, इसका दायरा सुरक्षा, आतंकवाद और परमाणु सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों तक विस्तृत हो गया है।

Did You Know?: ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि इसमें वैश्विक दक्षिण (Global South) की कई प्रभावशाली आवाजें शामिल हो गई हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ब्रिक्स ने परमाणु सुरक्षा पर क्या कहा?
उत्तर: ब्रिक्स ने नागरिक परमाणु सुविधाओं पर हमलों के खिलाफ गहरी चिंता व्यक्त की और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रश्न 2: प्रधानमंत्री मोदी के चार स्तंभ क्या हैं?
उत्तर: प्रधानमंत्री मोदी ने लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को ब्रिक्स के विकास के लिए मुख्य स्तंभ बताया है।