ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन पर 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया गया है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और वैश्विक व्यापार बाधाओं पर चिंता जताई गई है। भारत ने 11 देशों के इस विस्तारित समूह में आम सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों पर कड़ी कार्रवाई का आह्वान।
  • एकपक्षीय टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों के खिलाफ वैश्विक व्यापार नियमों के पालन पर जोर।
  • ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और अप्रत्याशित प्रतिबंधों के आर्थिक प्रभाव को कम करने की आवश्यकता।

ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का समापन नई दिल्ली घोषणापत्र के साथ हुआ है, जो वैश्विक आतंकवाद, व्यापारिक शुल्कों और भू-राजनीतिक संघर्षों पर इस शक्तिशाली समूह के सामूहिक रुख को स्पष्ट करता है। 140 अनुच्छेदों वाला यह व्यापक दस्तावेज़ संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादी संस्थाओं के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की मांग करता है। इसमें नागरिक लक्ष्यों पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा की गई है, जो वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत की कूटनीतिक कुशलता रही है। भारत ने 11-सदस्यीय विस्तारित समूह के भीतर विभिन्न हितों वाले देशों के बीच आम सहमति बनाने में सफलता हासिल की है। विशेष रूप से, मध्य पूर्व (West Asia) के संकट के बीच, भारत ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे महत्वपूर्ण देशों को एक साझा मंच पर लाने में संतुलनकारी भूमिका निभाई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स का विस्तार केवल संख्यात्मक नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को पुनर्गठित करने का एक प्रयास है। आतंकवाद पर साझा रुख और आर्थिक संप्रभुता की रक्षा का मुद्दा यह दर्शाता है कि ग्लोबल साउथ अब पश्चिमी प्रभुत्व वाले नियमों के बजाय एक अधिक समावेशी व्यवस्था की मांग कर रहा है।

आतंकवाद पर ब्रिक्स का एकजुट रुख वैश्विक सुरक्षा ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

घोषणापत्र में व्यापारिक बाधाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। दस्तावेज़ में उन एकपक्षीय टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों की आलोचना की गई है जो अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के विरुद्ध हैं। यह उन विकसित देशों के लिए एक कड़ा संदेश है जो आर्थिक प्रतिबंधों का उपयोग भू-राजनीतिक दबाव के रूप में करते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्रिक्स का गठन शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के रूप में हुआ था। हाल ही में इसका विस्तार हुआ है, जिससे इसकी भू-राजनीतिक प्रासंगिकता और आर्थिक वजन काफी बढ़ गया है। नई दिल्ली घोषणापत्र इस विस्तारित समूह की पहली बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।

Did You Know?: ब्रिक्स अब दुनिया की लगभग 45% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक जीडीपी में इसका योगदान तेजी से बढ़ रहा है।

Frequently Asked Questions

1. नई दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता दिखाना और व्यापारिक प्रतिबंधों के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाना है।

2. भारत ने इस सम्मेलन में क्या भूमिका निभाई?
भारत ने 11 देशों के बीच आम सहमति बनाने और मध्य पूर्व के देशों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।