ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता का संकल्प लिया गया है, जबकि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया संकट पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है।
- ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर जोर दिया गया है।
- पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा की गई है।
- चीन द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को बचाने की नीति पर चर्चा।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित कूटनीतिक संवाद।
हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खड़ा किया है। सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र में आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया गया है, जिसमें 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की गई है। यह कदम वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन' (UNCCIT) को लागू करने की मांग कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का रुख अभी भी संदिग्ध बना हुआ है। चीन लगातार पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध शासन के तहत सूचीबद्ध करने में बाधा उत्पन्न कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि बीजिंग बहुपक्षीय घोषणाओं के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ब्रिक्स के भीतर आतंकवाद पर यह साझा रुख न केवल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करता है। भारत की आतंकवाद विरोधी नीति और चीन की 'अवरोधक नीति' के बीच का टकराव भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करेगा।
आतंकवाद पर चीन का दोहरा रवैया ब्रिक्स की एकता और वैश्विक सुरक्षा ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह संवाद न केवल भारत-चीन सीमा विवाद (LAC) को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि दोनों देश पश्चिम एशिया संकट और ईरान के साथ बढ़ते संबंधों को कैसे देखते हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संकट और ईरान के साथ चीन के बढ़ते संबंधों ने भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। एक ओर जहाँ अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों का उपयोग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर जवाबी नीतियां अपना रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा से पहले यह स्थिति अत्यंत संवेदनशील है।
Historical Background
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है, जो विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर केंद्रित है। ब्रिक्स का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग के लिए किया गया था, लेकिन आतंकवाद और सीमा विवाद जैसे मुद्दों ने अक्सर इसके भीतर कूटनीतिक तनाव पैदा किया है।
Frequently Asked Questions
1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद पर क्या निर्णय लिया गया?
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है और पहलगाम हमले की निंदा की है।
2. चीन का आतंकवाद पर रुख क्या है?
चीन अक्सर पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल करने के प्रयासों को बाधित करता रहा है।