BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मिर्वाइज उमर फारूक ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात की और राष्ट्रपति पेज़ेशकियान को एक पत्र लिखा। इस बैठक में शांति, संवाद और महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत पर चर्चा की गई।
- मिर्वाइज उमर फारूक ने नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के इतर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात की।
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को एक पत्र लिखकर संघर्ष समाधान के लिए संवाद और जुड़ाव का आह्वान किया गया।
- बैठक में महात्मा गांधी के अहिंसा के दर्शन और मुस्लिम उम्माह की एकता पर चर्चा हुई।
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के इतर, कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु औरseparatist नेता मिर्वाइज उमर फारूक ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात के दौरान मिर्वाइज ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को संबोधित करते हुए एक औपचारिक पत्र भी सौंपा, जिसमें वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए कूटनीति और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया गया।
मिर्वाइज ने अरागची के साथ हुई चर्चा के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति, संघर्ष, शांति और संवाद जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से बातचीत की। उन्होंने विशेष रूप से महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का उल्लेख किया और कहा कि भारत इस दर्शन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर संयम और कूटनीति को बढ़ावा देने में एक रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुलाकात केवल एक धार्मिक या क्षेत्रीय मुलाकात नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक संबंधों का संकेत है। कश्मीर के नेतृत्व का ईरान के साथ इस तरह का जुड़ाव अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे की नई व्याख्या पेश कर सकता है।
"विवादों को अंतहीन टकराव के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता; अंततः सबसे कठिन विवादों को भी बातचीत की मेज पर ही आना पड़ता है।" - मिर्वाइज उमर फारूक
अपने पत्र में, मिर्वाइज ने मुस्लिम उम्माह के भीतर बढ़ते संप्रदायवाद के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, मुसलमानों को सांप्रदायिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मतभेद विश्वास और मानवता के मौलिक बंधनों को कमजोर नहीं करने चाहिए।
ऐतिहासिक रूप से, कश्मीर और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध रहे हैं। मिर्वाइज ने इस विरासत को याद करते हुए राष्ट्रपति पेज़ेशकियान को श्रीनगर की जामिया मस्जिद की अखरोट की लकड़ी से बनी एक प्रतिकृति भेंट की। उन्होंने उल्लेख किया कि फारसी विद्वत्ता, साहित्य और कला ने कश्मीरी सभ्यता पर एक गहरी छाप छोड़ी है।
Frequently Asked Questions
1. मिर्वाइज उमर फारूक ने ईरान को क्या संदेश दिया?
उन्होंने संवाद, कूटनीति और आपसी समझ के माध्यम से संघर्षों को सुलझाने का संदेश दिया और मुस्लिम एकता का आह्वान किया।
2. यह मुलाकात कहाँ हुई?
यह मुलाकात नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई।