BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के विरोध में दिल्ली पुलिस ने 64 तिब्बती प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी तिब्बती ध्वज लेकर भारत मंडपम की ओर बढ़ रहे थे जब उन्हें रोका गया।

  • BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली में तिब्बती समुदाय द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन।
  • तिब्बती यूथ कांग्रेस (TYC) के 64 सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।
  • प्रदर्शनकारियों ने चीन द्वारा तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
  • हिरासत में लिए गए लोगों को मंडवली, अशोक विहार, मधु विहार और गाजीपुर पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। शनिवार रात, दिल्ली पुलिस ने तिब्बती यूथ कांग्रेस (TYC) के लगभग 64 सदस्यों को हिरासत में ले लिया। ये प्रदर्शनकारी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा का कड़ा विरोध कर रहे थे और भारत मंडपम के पास भैरन मार्ग पर एकत्र हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए थे और भारत मंडपम के आयोजन स्थल की ओर दौड़ रहे थे। स्थिति तब नियंत्रण से बाहर होने लगी जब दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। दृश्य काफी तनावपूर्ण थे, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा घसीटते हुए भी देखा गया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विरोध केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह भारत-चीन संबंधों और क्षेत्रीय भू-राजनीति के बीच फंसे तिब्बती मुद्दे का प्रतिबिंब है। तिब्बती समुदाय का तर्क है कि चीन तिब्बत में सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मिटाने का प्रयास कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

चीन द्वारा तिब्बती संस्कृति और धर्म का दमन न केवल एक मानवाधिकार मुद्दा है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से भी सीधा जुड़ा हुआ है।

तिब्बती यूथ कांग्रेस के महासचिव तेनज़िन लोबसांग ने कहा कि उनका विरोध भारत द्वारा शिखर सम्मेलन की मेजबानी के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे वैश्विक मंच पर तिब्बत के संघर्ष को उजागर करना चाहते हैं। उन्होंने चीन से तिब्बती राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और तिब्बती पठार पर हो रहे अनियंत्रित निर्माण को रोकने की मांग की है।

ऐतिहासिक संदर्भ

तिब्बत का मुद्दा दशकों से भारत और चीन के बीच एक संवेदनशील विषय रहा है। 1950 के दशक में चीन के नियंत्रण के बाद से, तिब्बती निर्वासन और दलाई लामा के नेतृत्व में सांस्कृतिक संरक्षण की मांगें निरंतर जारी हैं। भारत में रहने वाला तिब्बती समुदाय अक्सर वैश्विक मंचों पर चीन के खिलाफ आवाज उठाता रहा है।

पुलिस ने शुक्रवार को भी कार्रवाई की थी, जब 'स्टूडेंट्स फॉर फ्री तिब्बत' के तीन छात्रों को प्रगति मैदान के पास पोल पर चढ़कर झंडे लहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उन्हें फिलहाल तिहाड़ जेल में रखा गया है।

Did You Know?: तिब्बती समुदाय का भारत में एक बहुत बड़ा और प्रभावशाली निर्वासन केंद्र है, जो दशकों से तिब्बती संस्कृति को जीवित रखने में मदद कर रहा है।

Frequently Asked Questions

1. प्रदर्शनकारी क्यों प्रदर्शन कर रहे थे?
प्रदर्शनकारी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और तिब्बत में चीन द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।

2. प्रदर्शनकारियों को कहां ले जाया गया?
हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को मंडवली, अशोक विहार, मधु विहार और गाजीपुर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया है।