18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अफ्रीकी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की, जिससे भारत-अफ्रीका संबंधों के एक नए युग की शुरुआत हुई है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका, बुरुंडी, युगांडा और नाइजीरिया के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।
- भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS) को जल्द आयोजित करने पर चर्चा शुरू हुई।
- डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, रक्षा, स्वास्थ्य और एआई (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया।
- ग्लोबल साउथ की एकजुटता और ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ एकजुटता पर बल दिया गया।
नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के हाशिए पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका महाद्वीप के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक कूटनीतिक अभियान चलाया। इबोला संकट के कारण स्थगित हुए भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS) की चर्चाओं को अब फिर से पटरी पर लाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ मुलाकात की, जिसमें आर्थिक सहयोग, रक्षा और सुरक्षा साझेदारी के साथ-साथ क्षमता निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई। इथियोपियाई प्रधानमंत्री ने अफ्रीका को डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में अग्रणी बनाने और एआई (AI) के क्षेत्र में अनुसंधान एवं कौशल विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह 'अफ्रीका आउटरीच' केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में 'ग्लोबल साउथ' के नेतृत्व की भारत की आकांक्षा को दर्शाता है। अफ्रीका के साथ बढ़ते संबंध चीन के प्रभाव को संतुलित करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लेकर भूमध्य सागर तक भारत की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अफ्रीकी देशों के साथ भारत का यह जुड़ाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक न्याय और वैश्विक शासन में सुधार की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ बैठक में, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। नई दिल्ली घोषणापत्र में ऐतिहासिक नस्लीय अन्याय और ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका द्वारा प्रस्तावित 'असमानता पर अंतरराष्ट्रीय पैनल' का उल्लेख किया गया। इसके अलावा, गाजा में मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए दक्षिण अफ्रीका द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया का भी समर्थन किया गया।
बुरुंडी के राष्ट्रपति इवारिस्टे नदायशिमीये के साथ चर्चा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन को जल्द से जल्द आयोजित करने की संभावना पर विचार किया। उन्होंने कृषि आधुनिकीकरण, स्वास्थ्य सेवा और क्षमता निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित किया। इसके अतिरिक्त, युगांडा और नाइजीरिया के प्रतिनिधियों के साथ तकनीकी साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और अफ्रीका के संबंध 1955 के बांडुंग सम्मेलन की विरासत से जुड़े हैं, जिसने एशियाई-अफ्रीकी एकजुटता की नींव रखी थी। वर्तमान में, भारत अफ्रीका को विकास के लिए एक भागीदार के रूप में देखता है, न कि केवल एक बाजार के रूप में।
Frequently Asked Questions
1. भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS) क्या है?
यह भारत और अफ्रीकी देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए आयोजित एक प्रमुख मंच है।
2. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का महत्व क्या है?
यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।