प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर मिस्र, दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार का विस्तार करना और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव सहित वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करना था।
- पीएम मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ रणनीतिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।
- मिस्र के राष्ट्रपति ने ईरान से क्षेत्रीय संघर्ष को कम करने और अरब देशों पर हमलों को रोकने का आग्रह किया।
- भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने के लिए अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों में अपने कूटनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ किया।
रूस के कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कूटनीति के मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पीएम मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और फिलीपींस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन वार्ताओं में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती हैं।
भारत और मिस्र के बीच द्विपक्षीय वार्ता बेहद महत्वपूर्ण रही। पीएम मोदी और राष्ट्रपति अल-सिसी ने दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते रणनीतिक संबंधों की समीक्षा की। इस दौरान मिस्र के राष्ट्रपति ने ब्रिक्स के भीतर रियायती वित्तपोषण (concessional financing) के विस्तार की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में 12 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी सहमति जताई।
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव पर बात करते हुए, मिस्र के राष्ट्रपति अल-सिसी ने ईरान से क्षेत्रीय संघर्ष को तुरंत कम करने का आग्रह किया। उन्होंने ईरान से अरब देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और उन पर हमलों को रोकने की अपील की। पीएम मोदी ने भी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली के लिए भारत के रुख को दोहराया और बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाने पर जोर दिया। यह बातचीत दर्शाती है कि भारत और मिस्र मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ अपनी मुलाकात में, पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा साझेदारी और ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने पर चर्चा की। इसके साथ ही, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
फिलीपींस के साथ हुई वार्ता में भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति (Act East Policy) को और गति मिली। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आपदा प्रबंधन में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। फिलीपींस के साथ मजबूत होते संबंध चीन के क्षेत्रीय प्रभुत्व को संतुलित करने की दिशा में भारत का एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर पीएम मोदी की ये द्विपक्षीय बैठकें केवल औपचारिक मुलाकातें नहीं हैं, बल्कि यह भारत की बहु-पक्षीय कूटनीति (Multi-alignment) का एक मास्टरस्ट्रोक है। मिस्र, दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस जैसे रणनीतिक भागीदारों के साथ संबंध मजबूत कर भारत खुद को वैश्विक दक्षिण के निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित कर रहा है, जो पश्चिमी देशों और उभरती शक्तियों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम है।
"ब्रिक्स के इतर भारत की सक्रिय द्विपक्षीय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली वैश्विक दक्षिण और विकसित देशों के बीच एक मजबूत कूटनीतिक सेतु के रूप में उभर रही है।"
| साझेदार देश | प्राथमिक फोकस क्षेत्र | रणनीतिक महत्व |
|---|---|---|
| मिस्र | व्यापार, रक्षा और पश्चिम एशिया शांति | स्वेज नहर तक पहुंच और मध्य पूर्व में भारत का प्रभाव |
| दक्षिण अफ्रीका | द्विपक्षीय व्यापार और बहुपक्षीय मंच | वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज मजबूत करना |
| फिलीपींस | समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग | इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक संतुलन |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र ने किस प्रमुख आर्थिक मुद्दे को उठाया?
उत्तर: मिस्र के राष्ट्रपति अल-सिसी ने ब्रिक्स के भीतर विकासशील देशों के लिए रियायती वित्तपोषण (concessional financing) के विस्तार की मांग की ताकि आर्थिक चुनौतियों से निपटा जा सके।
प्रश्न 2: भारत के लिए फिलीपींस के साथ द्विपक्षीय वार्ता का क्या महत्व है?
उत्तर: फिलीपींस के साथ वार्ता भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।