यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर किए गए ड्रोन हमलों के कारण रूस की घरेलू उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप उसने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया है।
- रूस ने अगस्त में 1,72,000 टन तेल उत्पादों का रिकॉर्ड आयात किया।
- भारत ने रूस के कुल तेल उत्पाद आयात का 70% हिस्सा आपूर्ति किया।
- यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को गंभीर रूप से बाधित किया है।
- रूस अपनी ही कंपनी (Rosneft) के स्वामित्व वाली भारतीय रिफाइनरी से ईंधन वापस खरीद रहा है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन द्वारा रूस की ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल रिफाइनरियों पर किए गए निरंतर ड्रोन हमलों ने मॉस्को की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को काफी हद तक पंगु बना दिया है। इस संकट के बीच, रूस ने अगस्त में रिकॉर्ड 1,72,000 टन तेल उत्पादों का आयात किया है, जिसमें भारत से प्राप्त गैसोलीन की बड़ी मात्रा शामिल है।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के अनुसार, अगस्त के महीने में रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में भारत की हिस्सेदारी 70% रही। इसमें 78 मिलियन यूरो मूल्य का 1,20,000 टन गैसोलीन शामिल है। यह आयात का स्तर पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना अधिक और पूरे 2025 के कुल आयात से तीन गुना ज्यादा है।
रूस की निर्भरता का विश्लेषण
दिलचस्प और जटिल बात यह है कि भारत से आयात किया गया सारा गैसोलीन वडिनार रिफाइनरी से लोड किया गया था, जो कि नेयारा एनर्जी (Nayara Energy) द्वारा बेचा गया। नेयारा एनर्जी में रूस की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) की 49.13% हिस्सेदारी है। इसका मतलब यह है कि रूस अपने ही कच्चे तेल को भारत में रिफाइन करवा रहा है और फिर उसे वापस खरीदने के लिए भुगतान कर रहा है ताकि अपनी घरेलू कमी को पूरा कर सके।
रूस एक ऐसी रिफाइनरी को भुगतान कर रहा है जिसका वह आंशिक रूप से मालिक है, ताकि अपने ही कच्चे तेल को उस ईंधन में बदला जा सके जिसे वह अब खुद नहीं बना सकता।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह व्यापारिक चक्र यूक्रेन के रणनीतिक हमलों का सीधा परिणाम है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस के प्रमुख निर्यात बंदरगाहों, जैसे कि तुआपसे (Tuapse) और नोवोरोसिस्क (Novorossiysk) को निशाना बनाया है, जिससे तेल लोडिंग में भारी गिरावट आई है।
Why This Matters
यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस, जो ऐतिहासिक रूप से दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइंड पेट्रोलियम निर्यातक रहा है, अब खुद आयातक की भूमिका में आ गया है। भारत की भूमिका यहाँ एक महत्वपूर्ण 'मिडलमैन' और रिफाइनिंग हब के रूप में उभर रही है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक नया संतुलन बना रही है।
| देश | आयातित तेल उत्पाद (टन) | मुख्य उत्पाद |
|---|---|---|
| भारत | 1,20,000 | गैसोलीन |
| मिस्र | 25,000 | डीजल |
| दक्षिण कोरिया | 18,000 | गैसोइल |
Frequently Asked Questions
1. रूस भारत से मुख्य रूप से क्या आयात कर रहा है?
रूस मुख्य रूप से भारत से गैसोलीन और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद आयात कर रहा है।
2. यूक्रेन के हमलों का रूस पर क्या प्रभाव पड़ा है?
यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता और तेल निर्यात बंदरगाहों को बाधित कर दिया है, जिससे ईंधन की कमी हो रही है।