चीन ने इस बार BRICS मंच पर पाँच रणनीतिक कदम उठाए हैं जो भारत की सुरक्षा और आर्थिक हितों को चुनौती दे सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर सावधानी बरतने का संकेत दिया, जबकि बीजिंग अपने ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ योजना को आगे बढ़ा रहा है।
- चीन ने BRICS में व्यापार सुगम बनाने की नई पहल की।
- बीजिंग ने कौशल‑युक्त श्रमिकों की आपूर्ति का वादा किया।
- शिनजियांग‑संबंधी सुरक्षा मुद्दे भारत को असहज कर रहे हैं।
चीन की नई पहलें क्या हैं?
बीजिंग ने हालिया BRICS शिखर सम्मेलन में पाँच प्रमुख प्रस्ताव पेश किए: व्यापार बाधाओं को कम करना, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना, कौशल‑विकास केंद्र स्थापित करना, डिजिटल बुनियादी ढांचा साझा करना और ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ के तहत सामरिक सहयोग को बढ़ाना। ये कदम चीन को आर्थिक प्रभुत्व बढ़ाने और भारत को रणनीतिक रूप से अलग करने का लक्ष्य रखते हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के बाद कहा, “हम भारतीय जमीन और संसाधनों के उपयोग को किसी भी विदेशी शक्ति के खिलाफ नहीं होने देंगे।” उन्होंने चीन को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और आर्थिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
BRICS का गठन 2009 में हुआ था, जिसका मूल उद्देश्य विकासशील देशों को वैश्विक आर्थिक मंच पर समान अधिकार देना था। पिछले दो दशकों में चीन ने इस समूह के भीतर अपनी भूमिका को निरंतर विस्तारित किया है, जबकि भारत ने हमेशा संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that China's push for a “Greater BRICS” could reshape trade routes, technology standards, and geopolitical alignments in Asia, potentially sidelining India’s strategic projects like the International North‑South Transport Corridor.
"यदि चीन की नई आर्थिक नीतियां सफल होती हैं, तो भारत को अपनी आपूर्ति श्रृंखला को पुनःस्थापित करने की तत्काल आवश्यकता होगी," कहा अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या चीन की ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ योजना भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करेगी?
A: यह संभावना है, क्योंकि नई व्यापार corridors और डिजिटल मानकों से भारत के मौजूदा साझेदारियों पर दबाव पड़ेगा।
Q2: भारत इस चुनौती का सामना कैसे कर सकता है?
A: भारत को वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाएँ, घरेलू निर्माण क्षमता, और रणनीतिक गठबंधनों को मजबूत करना होगा।