सिदार्थ बाबू, 36 वर्ष के आईएफएस अधिकारी, जो 2017 में यूपीएससी में 15वां स्थान हासिल कर भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए, को हाल ही में मोदी‑शी‑पुतिन की BRICS बैठक की तस्वीर में चौथा व्यक्ति पाया गया। उनके करियर की कहानी, चीन में बिताए चार वर्षों और उनके भाषाई कौशल ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण भूमिका दी है।

  • सिदार्थ बाबू 15वें रैंक के साथ यूपीएससी में सफलता पाई।
  • उन्होंने चार वर्ष चीन में रहकर मंदारिन और कूटनीति का प्रशिक्षण लिया।
  • उनकी उपस्थिति मोदी‑शी‑पुतिन की तस्वीर में वैश्विक कूटनीति की परछाई को दर्शाती है।

सिदार्थ बाबू 36 वर्ष के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी हैं, जिन्होंने 2017 में यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में 15वां स्थान प्राप्त किया। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके व्यक्तिगत संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि भारतीय कूटनीति के नए चेहरे को भी उजागर करती है।

कौटुंबिक पृष्ठभूमि से लेकर शिक्षा तक, बाबू का सफर एक प्रेरणादायक कथा है। वे कोच्चि के कलूर से आते हैं और नवा निर्माण वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा भवन्स आदर्श विद्यालय में पढ़े। 2012 में उन्होंने महाराज एथनासियस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी.टेक पूरा किया। इसके बाद दो साल तक ई‑कॉमर्स में कार्य करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेस की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।

2017 में 26 वर्ष की आयु में वे यूपीएससी के अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षा में 15वां रैंक लेकर भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश कर सके। विदेश सेवा में चयन के बाद उन्होंने मंदारिन भाषा का अध्ययन किया, जो भारतीय विदेशी सेवा के लिए अनिवार्य है। 2018 से 2022 तक वे बीजिंग के भारतीय दूतावास में कार्यरत रहे, इस दौरान कोविड‑19 महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने भाषा और चीनी इतिहास, राजनीति तथा अर्थव्यवस्था पर गहन अध्ययन किया।

2022 में उन्होंने मिडलबरी इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ से अंग्रेजी‑से‑मंदारिन और मंदारिन‑से‑अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या में मास्टर्स पूरा किया। 2024 में दिल्ली के विदेश मंत्रालय में अंडर सीक्रेटरी के रूप में नियुक्ति के बाद वे ईस्ट एशिया डिवीजन के डिप्टी सीक्रेटरी बने, जहाँ भारत के चीन, जापान, दक्षिण और उत्तर कोरिया के साथ संबंधों का प्रबंधन होता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक युवा अधिकारी की उपस्थिति, वैश्विक कूटनीति में भारत की उभरती भूमिका को दर्शाती है। यह दर्शाता है कि कैसे भारतीय प्रतिभा, कठोर चयन प्रक्रिया और बहुभाषी क्षमताएँ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को एक मजबूत खिलाड़ी बनाती हैं।

"सिदार्थ बाबू का करियर यह साबित करता है कि कड़ी मेहनत और बहुभाषी कौशल से एक भारतीय युवा वैश्विक कूटनीति में अपनी जगह बना सकता है।"
Did You Know?: भारत के विदेशी सेवा अधिकारी को कम से कम एक विदेशी भाषा सीखना अनिवार्य है, और मंदारिन सीखना विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सिदार्थ बाबू को मोदी‑शी‑पुतिन की तस्वीर में क्यों दिखाया गया?
वह भारत के विदेश मंत्रालय के ईस्ट एशिया डिवीजन में कार्यरत हैं और अक्सर उच्च स्तरीय कूटनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

2. यूपीएससी में 15वां स्थान पाने का क्या महत्व है?
यह एक बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा में शीर्ष 20 में आने को दर्शाता है और यह भारतीय सरकारी सेवाओं के लिए एक प्रतिष्ठित स्थान है।