पूर्व भारतीय राजदूत अशोक कांथा ने भारत-चीन संबंधों में किसी भी तरह के 'नए सवेरे' की संभावना को खारिज कर दिया है। उन्होंने सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे गंभीर मुद्दों को संबंधों के सामान्य होने में बड़ी बाधा बताया है।
- पूर्व राजदूत अशोक कांथा ने भारत-चीन संबंधों में किसी बड़े बदलाव या 'रीसेट' से इनकार किया।
- भारत सीमा पर शांति को संबंधों के सामान्य होने की पूर्व शर्त मानता है।
- चीन व्यापारिक असंतुलन और सीमा पर अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर अडिग है।
पूर्व भारतीय राजदूत अशोक कांथा ने हालिया राजनयिक चर्चाओं के बाद भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। इंडिया टुडे से बात करते हुए, कांथा ने उन धारणाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच संबंधों में कोई बड़ा सुधार या 'नया सवेरा' आया है।
कांथा ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली और बीजिंग द्वारा जारी राजनयिक बयानों में गहरा अंतर है। जहाँ भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पर शांति और स्थिरता संबंधों के सामान्य होने के लिए एक अनिवार्य पूर्व शर्त है, वहीं चीन इन दोनों मुद्दों को समानांतर ट्रैक पर चलाने की कोशिश कर रहा है। इसका अर्थ है कि चीन चाहता है कि व्यापार और कूटनीति जारी रहे, भले ही सीमा पर तनाव बना रहे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि भारत की कूटनीतिक रणनीति अब 'सीमा पहले, संबंध बाद में' के सिद्धांत पर टिकी है। यदि चीन सीमा पर यथास्थिति बनाए रखने में विफल रहता है, तो आर्थिक संबंधों में किसी भी प्रकार की नरमी की संभावना बहुत कम है।
मैं इसे भारत-चीन संबंधों में नए सवेरे या संबंधों के रीसेट के रूप में वर्णित नहीं करूँगा।
अशोक कांथा ने जमीनी स्तर पर मौजूद परिचालन वास्तविकताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ की रिपोर्टों और सीमा पर सैनिकों की संख्या कम करने (de-escalation) की प्रक्रिया के अभाव का उल्लेख किया। यह दर्शाता है कि कागजी चर्चाओं और वास्तविक सीमा नियंत्रण के बीच एक बड़ी खाई है।
इसके अलावा, संरचनात्मक बाधाएं भी संबंधों को पटरी पर आने से रोक रही हैं। इसमें बढ़ता व्यापार असंतुलन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रतिबंधित करने वाले चीनी फरमान और मई 2025 के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चीन-पाकिस्तान के बीच सैन्य समन्वय जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और चीन के बीच संबंध 1962 के युद्ध के बाद से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। डोकलाम विवाद और गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी सबसे अधिक है, जिससे वर्तमान कूटनीतिक गतिरोध पैदा हुआ है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: भारत की मुख्य शर्त क्या है?
उत्तर: भारत का मानना है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही संबंधों के सामान्य होने की पहली शर्त है।
प्रश्न 2: अशोक कांथा कौन हैं?
उत्तर: अशोक कांथा चीन में भारत के पूर्व राजदूत हैं और एक अनुभवी राजनयिक हैं।