सउदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति का 4% हिस्सा खतरे में पड़ गया है। मरम्मत में हफ्तों लग सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।
- सउदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमला, मरम्मत में 3 से 5 सप्ताह लग सकते हैं।
- वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4% हिस्सा प्रभावित होने का खतरा।
- हुथी विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव से रेड सी के समुद्री मार्ग पर भी संकट।
- ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल, $109 के स्तर तक पहुंची।
रियाद, सउदी अरब: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी आपदा की आहट सुनाई दे रही है। सउदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए एक हालिया ड्रोन हमले ने दुनिया भर के तेल आपूर्ति नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है। इस हमले के बाद पाइपलाइन के बड़े हिस्से के बंद होने की संभावना है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा खतरे में पड़ गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह 1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन गल्फ तट के तेल उत्पादक क्षेत्रों को लाल सागर के बंदरगाह यानबू से जोड़ती है। सउदी अधिकारियों ने इस हमले का आरोप ईरान समर्थित मिलिशिया पर लगाया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मुख्य पंपिंग स्टेशन को हुए नुकसान को ठीक करने में तीन से पांच सप्ताह का समय लग सकता है। यदि मरम्मत में देरी होती है, तो यानबू बंदरगाह पर मौजूद तेल का स्टॉक केवल पांच से सात दिनों में समाप्त हो सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट केवल एक पाइपलाइन की मरम्मत तक सीमित नहीं है। यह एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' की स्थिति है जहाँ एक तरफ पाइपलाइन ठप है और दूसरी तरफ हुथी विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह दोहरे संकट के कारण वैश्विक शिपिंग मार्ग और तेल की कीमतों पर अभूतपूर्व दबाव डाल रहा है।
पाइपलाइन का बंद होना और समुद्री मार्गों पर बढ़ता खतरा वैश्विक तेल बाजार के लिए एक 'ब्लैक स्वान' घटना साबित हो सकता है।
तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है। Rystad Energy के आंकड़ों के अनुसार, इस पाइपलाइन से प्रतिदिन औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल कच्चा तेल बहता था। हमले के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़कर $109 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो बाजार में आपूर्ति की कमी की आशंका को दर्शाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सउदी अरब ने हमेशा से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जोखिमों से बचने के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का उपयोग एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में किया है। होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, लेकिन ईरान के साथ तनाव के कारण वहां से शिपिंग करना जोखिम भरा हो गया है। अब, जब यह वैकल्पिक पाइपलाइन भी खतरे में है, तो सउदी अरब के लिए निर्यात करना अत्यंत कठिन और महंगा हो गया है।
Frequently Asked Questions
1. इस हमले का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
सउदी अरब से तेल आपूर्ति में कमी आने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा।
2. मरम्मत में कितना समय लगेगा?
प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, पंपिंग सुविधाओं को ठीक करने में 3 से 5 सप्ताह का समय लग सकता है।