वाशिंगटन डी.सी. के एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मेल-इन वोटिंग को सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है। यह फैसला आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया है, जबकि मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने की कगार पर है।
- वाशिंगटन डी.सी. के न्यायाधीश कार्ल जे. निकोलस ने ट्रंप के मेल बैलेट नियमों पर रोक लगाई।
- कोर्ट ने कहा कि इन नियमों से मतदाताओं के मताधिकार के प्रभावित होने का गंभीर जोखिम है।
- सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतिम फैसला सुनाने के लिए तैयार है।
- नए नियम डाक सेवा को बैलेट डिजाइन और मतदाता पहचान सत्यापन के लिए मजबूर करते।
वाशिंगटन, डी.सी. में एक संघीय न्यायाधीश ने रविवार देर रात एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है, जिसका उद्देश्य आगामी मध्यावधि चुनावों के लिए मेल-इन बैलेटिंग (डाक द्वारा मतदान) को सीमित करना था। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन के चुनाव नियमों को बदलने के प्रयासों के लिए एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश कार्ल जे. निकोलस ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि इस आदेश पर रोक नहीं लगाई गई, तो चुनावी प्रक्रिया में भारी जोखिम बना रहेगा। उन्होंने लिखा, “वादी यह साबित करने में सफल रहे हैं कि बिना निषेधाज्ञा के, इस बात का बढ़ा हुआ जोखिम है कि आगामी चुनावों में एक बड़ी संख्या में वैध अनुपस्थित या मेल-इन बैलेट अंततः गिने नहीं जाएंगे।”
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानूनी लड़ाई केवल प्रशासनिक नियमों के बारे में नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी लोकतंत्र की पहुंच और चुनावी अखंडता के बीच के संघर्ष का प्रतीक है। यदि इन नियमों को लागू किया जाता, तो डाक सेवा के कर्मचारियों पर मतदाता पात्रता की जांच करने का अतिरिक्त बोझ पड़ता, जिसे डाक कर्मचारी संघ ने सिरे से खारिज कर दिया है।
न्यायालय का यह हस्तक्षेप सुनिश्चित करता है कि चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव इतने अंतिम समय पर न किए जाएं कि वे मतदाताओं को उनके मौलिक अधिकार से वंचित कर दें।
इससे पहले, बोस्टन में न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने भी इसी तरह का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रशासन की उस अपील पर विचार कर रहा है जिसमें तलवानी के आदेश को चुनौती दी गई थी। अब निकोलस के फैसले ने कानूनी पेच को और अधिक जटिल बना दिया है।
ट्रंप द्वारा प्रस्तावित नए नियम डाक सेवा (USPS) को सभी बैलेट लिफाफे के डिजाइनों को पहले से स्वीकृत करने और राज्यों को मतदाताओं की पहचान एक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के लिए बाध्य करते हैं। चुनाव अधिकारियों का तर्क है कि चुनाव के इतने करीब इन बदलावों को लागू करना तकनीकी रूप से असंभव है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मेल-इन बैलेटिंग लंबे समय से डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर रही है। उन्होंने 2020 के चुनाव में अपनी हार के लिए इसे गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया था, जबकि स्वयं उन्होंने भी मतदान के इस तरीके का उपयोग किया था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: न्यायाधीश निकोलस ने रोक क्यों लगाई?
उत्तर: क्योंकि उन्हें डर था कि नए नियमों के कारण बड़ी संख्या में वैध वोटों को नहीं गिना जा सकेगा।
प्रश्न 2: क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा?
उत्तर: हाँ, सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस मुद्दे पर विचार कर रहा है और अंतिम फैसला सुनाने की संभावना है।