संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि सुरक्षा परिषद महाशक्तियों के कारण पंगु हो गई है, लेकिन वैश्विक संस्था के रूप में UN अभी भी प्रासंगिक है। उन्होंने भारत द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थता के प्रयासों की भी सराहना की।
- सुरक्षा परिषद महाशक्तियों के बीच विभाजन के कारण कार्य करने में असमर्थ है।
- गुटेरेस ने रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत की मध्यस्थता भूमिका की प्रशंसा की।
- UN महासचिव का कार्यकाल इस वर्ष के अंत में समाप्त हो रहा है।
- वैश्विक नेतृत्व में 'दंडमुक्ति' (impunity) की संस्कृति एक गंभीर चुनौती है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक राजनीति की वर्तमान स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में, उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद वर्तमान में पंगु (paralysed) हो चुकी है। उनका तर्क है कि महाशक्तियां यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि उनकी शक्ति की भी कुछ सीमाएं हैं, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक नेतृत्व में विभाजन और 'दंडमुक्ति' की संस्कृति पनप रही है।
गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि हालांकि सुरक्षा परिषद के भीतर गतिरोध बना हुआ है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र संस्था पूरी तरह से विफल या टूट गई है। उन्होंने संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया ताकि बदलते वैश्विक परिदृश्य में UN की प्रासंगिकता बनी रहे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सुरक्षा परिषद में व्याप्त यह गतिरोध केवल कूटनीतिक विफलता नहीं है, बल्कि यह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (multipolar world order) के उदय का संकेत है। जब स्थायी सदस्य अपने हितों को वैश्विक शांति से ऊपर रखते हैं, तो UN का मूल उद्देश्य खतरे में पड़ जाता है।
महाशक्तियों द्वारा अपनी सीमाओं को न पहचानना वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
भारत के संदर्भ में, गुटेरेस ने रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता करने के भारत के प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने भारत की संतुलित विदेश नीति को वैश्विक स्थिरता के लिए एक सकारात्मक कारक के रूप में देखा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हाल ही में विश्व मानचित्र से जुड़े विवाद पर भी स्पष्टीकरण दिया, जिससे संस्थागत पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिली।
गुटेरेस का कार्यकाल इस वर्ष के अंत में समाप्त होने वाला है, जिससे अब दुनिया की नजरें उनके उत्तराधिकारी के चुनाव और भविष्य की UN कार्ययोजना पर टिकी हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और गाजा संकट पर भी उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त की है, जो वैश्विक मानवीय संकट की भयावहता को दर्शाता है।
Frequently Asked Questions
1. गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद को पंगु क्यों कहा?
महाशक्तियों के बीच बढ़ते मतभेदों और उनके द्वारा अपनी शक्ति के दुरुपयोग के कारण परिषद निर्णय लेने में असमर्थ है।
2. भारत की भूमिका पर गुटेरेस का क्या कहना है?
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति स्थापित करने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना की है।