यमन में हुथी विद्रोहियों के बढ़ते हमले के कारण हजारों लोग समुद्र के रास्ते जिबूती की ओर भाग रहे हैं। मात्र 48 घंटों में 3,400 से अधिक लोग जिबूती के तट पर पहुंचे हैं, जिससे वहां मानवीय संकट गहराने का खतरा है।
- यमन में हुथी विद्रोहियों के सैन्य अभियान के कारण हजारों लोग जिबूती की ओर पलायन कर रहे हैं।
- पिछले 48 घंटों में 3,400 से अधिक शरणार्थी जिबूती के उत्तरी तट पर पहुंचे हैं।
- जिबूती की सीमित संसाधन और जनसंख्या के कारण मानवीय संकट बढ़ने की गंभीर आशंका है।
यमन में जारी भीषण युद्ध और हुथी विद्रोहियों के हालिया सैन्य हमलों ने एक बड़े मानवीय संकट को जन्म दे दिया है। जिबूती अधिकारियों के अनुसार, पिछले 48 घंटों के भीतर 3,400 से अधिक शरणार्थी जिबूती के उत्तरी तट पर पहुंचे हैं। यह पलायन तब शुरू हुआ जब हुथी बलों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह मोचा पर कब्जा कर लिया और जिबूती के निकटवर्ती जलमार्ग की ओर बढ़ना शुरू कर दिया।
वीडियो फुटेज में देखा गया है कि लकड़ी की छोटी नावों (dhows) और बड़े जहाजों में भरकर महिलाएं और बच्चे जिबूती के ओबॉक (Obock) शहर के पास पहुंच रहे हैं। इनमें से कई बच्चे लाइफ जैकेट पहने हुए हैं, जो इस यात्रा की भयावहता को दर्शाता है। जिबूती के वित्त मंत्री इलियास दवालेह ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि शरणार्थियों के आने की यह गति देश के लिए संभालने में अत्यंत कठिन होती जा रही है।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक शरणार्थी संकट नहीं है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति के लिए भी एक बड़ा खतरा है। जिबूती का स्थान बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य के पास है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग गलियारों में से एक है। यदि इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर पड़ेगा।
जिबूती की स्थिरता सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, यमन के भीतर विस्थापन भी तेजी से बढ़ रहा है, जहां केवल सितंबर के पहले दो हफ्तों में 85,000 से अधिक लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि समुद्र पार करने वाले बच्चों को भीषण गर्मी, निर्जलीकरण और पीने के साफ पानी की कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यमन में संघर्ष 2015 में बड़े पैमाने पर शुरू हुआ था, जिसके दौरान 15,700 से अधिक शरणार्थी जिबूती पहुंचे थे। जिबूती पहले से ही सोमालिया, इथियोपिया और यमन के लगभग 36,000 पंजीकृत शरणार्थियों की मेजबानी कर रहा है। वर्तमान संकट देश के सीमित संसाधनों और बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव डाल रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. शरणार्थी जिबूती क्यों आ रहे हैं?
यमन में हुथी विद्रोहियों के हमलों और बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण लोग अपनी जान बचाने के लिए समुद्र के रास्ते जिबूती पहुंच रहे हैं।
2. जिबूती पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
जिबूती की जनसंख्या कम है और संसाधन सीमित हैं, जिससे शरणार्थियों की बड़ी संख्या वहां की स्वास्थ्य और खाद्य सेवाओं पर भारी दबाव डाल रही है।