फोरम ऑफ ह्यूमन राइट्स इन जेएंडके ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन अधिनियम को रद्द करने और राज्य का दर्जा बहाल करने की पुरजोर मांग की है। पूर्व गृह सचिव गोपाल पिल्लई ने इसे संवैधानिक ढांचे के खिलाफ बताया है।
मुख्य बिंदु
- पूर्व गृह सचिव गोपाल पिल्लई और राधा कुमार ने जेएंडके पुनर्गठन अधिनियम को रद्द करने की मांग की।
- फोरम ने कहा कि राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलना संविधान के अनुच्छेद 1 और 3 का उल्लंघन है।
- लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई गई।
- जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी होने का दावा किया गया।
फोरम ऑफ ह्यूमन राइट्स इन जेएंडके की वार्षिक रिपोर्ट ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पूर्व गृह सचिव गोपाल पिल्लई और पूर्व मध्यस्थ राधा कुमार ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर को उसका पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को निरस्त करने की मांग की।
रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि स्वतंत्र भारत में यह पहली बार है जब किसी मौजूदा राज्य को 'डाउनग्रेड' करके केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। फोरम के अनुसार, यह कदम भारत के संघीय ढांचे और संविधान के अनुच्छेद 1 और 3 के विरुद्ध है। यदि यह कदम असंवैधानिक था, तो राज्य का दर्जा बहाल करना अनिवार्य है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर में वर्तमान शासन व्यवस्था एक गतिरोध का सामना कर रही है। एक तरफ उपराज्यपाल (LG) के पास अत्यधिक शक्तियां हैं, जो जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं, और दूसरी तरफ निर्वाचित प्रशासन के पास जनता के प्रति जवाबदेही तो है, लेकिन शासन करने की वास्तविक शक्ति नहीं है।
राज्य का दर्जा बहाल करना केवल राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता की बहाली है।
फोरम ने सुरक्षा स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की है। हालिया आतंकवादी हमलों को 'सुरक्षा चूक' बताते हुए, उन्होंने कहा कि इसके जवाब में पुलिस द्वारा की जा रही हिरासत और कार्रवाई संदिग्ध हो सकती है। इसके अलावा, लद्दाख में भी राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को दोहराया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अगस्त 2019 में, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाते हुए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम पारित किया था, जिससे राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया था। यह निर्णय भारतीय राजनीति के सबसे विवादास्पद मोड़ों में से एक रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. फोरम ने पुनर्गठन अधिनियम के बारे में क्या कहा?
फोरम ने इसे असंवैधानिक बताया और मांग की कि इसे रद्द कर राज्य का दर्जा बहाल किया जाए।
2. लद्दाख की मुख्य मांग क्या है?
लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग की जा रही है।