दक्षिण कोलकाता के धाकुरिया क्षेत्र में महिलाओं ने बेदखली के नोटिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पुनर्वास की योजना के बिना, ढकुड़िया फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले परिवार अनिश्चितता के साये में जी रहे हैं।
मुख्य बातें
- धाकुरिया फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले 58 परिवार बेदखली के खतरे में हैं।
- महिला घरेलू कामगारों ने पुनर्वास की मांग को लेकर 24 घंटे का धरना शुरू किया है।
- प्रशासन द्वारा बिना किसी वैकल्पिक आवास योजना के नोटिस जारी करने का आरोप।
- कलकत्ता उच्च न्यायालय से केवल एक दिन का स्टे मिला है।
दक्षिण कोलकाता के धाकुरिया क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं ने प्रशासन द्वारा जारी किए गए बेदखली के नोटिस के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। धाकुरिया फ्लाईओवर के नीचे रहने वाले कम से कम 58 परिवार वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। मंगलवार से शुरू हुआ यह 24 घंटे का धरना प्रदर्शन उन परिवारों की हताशा को दर्शाता है, जिनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस देर रात आकर उन्हें डराते-धमकाते हैं। पश्चिम बंगाल घरेलू कामगार संघ की सदस्य सपना त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस की गाड़ियों की आवाजाही से पूरे इलाके में डर का माहौल बना रहता है। इनमें से 43 परिवारों के पास अपने निवास का दस्तावेजी प्रमाण भी मौजूद है, फिर भी उन्हें बेघर करने की तैयारी की जा रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल आवास का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और शहरी विकास के बीच के संघर्ष का है। जब शहरों का 'सौंदर्यीकरण' किया जाता है, तो अक्सर उन लोगों को हाशिए पर धकेल दिया जाता है जो शहर की अर्थव्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
"विकास और सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया में हमें क्यों बाहर कर दिया जाता है, जबकि हम ही हैं जो समाज को गतिमान रखते हैं?" - विभा नास्कर, सचिव, पश्चिम बंगाल घरेलू कामगार संघ।
इस संकट का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है। एक कॉलेज छात्रा ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि बेघर होने के डर ने उसकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से, विशेष रूप से मई 2026 के बाद, झुग्गी बस्तियों और रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ 'बुलडोजर कार्रवाई' की खबरें बढ़ी हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे गरीब वर्गों के खिलाफ एक व्यवस्थित crackdown मान रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या इन परिवारों के पास रहने का कोई कानूनी आधार है?
हाँ, लगभग 43 परिवारों के पास अपने निवास का दस्तावेजी प्रमाण है।
2. वर्तमान में कानूनी स्थिति क्या है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने फिलहाल केवल एक दिन का स्टे दिया है, और मामले की अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है।