भारत में 3.96 लाख से अधिक लंबित नशा मामलों को देखते हुए, गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष एनडीपीएस कोर्ट स्थापित करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में सिर्फ 65 ही विशिष्ट कोर्ट कार्यरत हैं, जिससे मामलों की तेजी से निपटारा संभव हो सके।

मुख्य बिंदु

  • कुल 3.96 लाख लंबित एनडीपीएस मामले
  • केवल 65 विशिष्ट एनडीपीएस कोर्ट वर्तमान में काम कर रहे हैं
  • सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को अतिरिक्त कोर्ट स्थापित करने का आदेश

बड़ी खबर

भारत में नशे के मामलों की बढ़ती लटपट को देखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष एनडीपीएस (नशा नियंत्रण) कोर्ट स्थापित करने का अनिवार्य निर्देश जारी किया है। यह कदम पिछले छह महीनों में कई समीक्षा बैठकों के बाद लिया गया, जहाँ यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश राज्यों ने अभी तक ऐसा कोई कोर्ट नहीं बनाया है।

वर्तमान में देश भर में केवल 65 विशिष्ट एनडीपीएस कोर्ट कार्यरत हैं, जबकि 3.96 लाख मामलों की लंबित सूची को सुलझाने के लिए लगभग 500 से अधिक नई अदालतों की आवश्यकता है। पंजाब (60,000 मामले), केरल (50,000), ओडिशा (17,000), तमिलनाडु (15,000), कर्नाटक (15,000), मध्य प्रदेश (14,000), पश्चिम बंगाल (11,000) और हिमाचल प्रदेश (11,000) जैसे राज्यों में मामलों की संख्या विशेष रूप से अधिक है।

मंत्रालय ने इन राज्यों को अतिरिक्त कोर्ट स्थापित करने के साथ‑साथ प्री‑ट्रायल कॉन्फ्रेंस जैसी तेज़ी‑से‑निपटाने वाली प्रक्रियाएँ अपनाने का निर्देश भी दिया है। सभी राज्यों को 8 अगस्त की नियत तिथि से पहले अपना अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नारकोटिक्स कंट्रोल एक्ट, 1985 ने नशा मामलों की सजा को सख़्त बनाया, परंतु पिछले दो दशकों में कोर्ट में मामलों की बढ़ती संख्या ने न्यायिक प्रणाली को अभिभूत कर दिया। 2010 में पहली बार विशेष नशा ट्रायल कोर्ट स्थापित किए गए थे, परंतु उनका विस्तार सीमित रहा। इस नई पहल का उद्देश्य उन अधूरे मामलों को शीघ्रता से निपटाना और नशा नियंत्रण के व्यापक राष्ट्रीय रणनीति को साकार करना है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि विशेष एनडीपीएस कोर्टों की त्वरित स्थापना न केवल न्यायिक बोझ को घटाएगी, बल्कि नशा के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करेगी, जिससे सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

"विशेष अदालतों के बिना नशा मामलों की लटपट खत्म नहीं होगी; यह संरचना न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाती है," कहते हैं पूर्व न्यायाधीश अजय सिंह।
क्या आप जानते हैं?: भारत में सबसे अधिक नशा मामलों की लटपट कर्नाटक और तमिलनाडु में पाई जाती है, जहाँ हर साल लगभग 20,000 नए केस दर्ज होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. क्या सभी राज्यों ने नई कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है?
    उत्तर: कई राज्यों ने तुरंत कार्यवाही शुरू की है, परंतु कुछ में अभी भी प्रक्रिया लंबित है।
  2. क्या ये विशेष कोर्ट केवल नशा मामलों के लिए ही कार्य करेंगे?
    उत्तर: हाँ, इनका कार्यक्षेत्र केवल एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों तक सीमित रहेगा।