फराह खान ने शिरीष कुन्दर के साथ दो दशकों के विवाह को लेकर अपने भावनात्मक बदलावों को साझा किया। उन्होंने पति की पिता‑भूमिका को सराहा और रिश्ते में भरोसे की महत्ता पर प्रकाश डाला, जबकि मनोवैज्ञानिक ने दीर्घकालिक संबंधों के विकास पर विशेषज्ञ टिप्पणी की।
फिल्म निर्माता और कोरियोग्राफर फराह खान ने शेखर सुमन के यूट्यूब शो में बताया कि पिछले बीस सालों में उनके शादी‑शादी के रिश्ते में क्या‑क्या बदलाव आए। शुरुआती रोमांस की चमक से हटकर अब वह अपने पति शिरीष कुन्दर को एक पिता, परिवार का सहारा और व्यक्तिगत विकास के साथी के रूप में देखती हैं।
विवाह में सराहना का नया स्वरूप
फराह ने कहा, “अब मैं शिरीष को अलग तरह से महत्व देती हूँ—एक पिता, एक ऐसा व्यक्ति जो पूरे परिवार का ख्याल रखता है।” उन्होंने बताया कि शिरीष ने तीन बच्चों की पढ़ाई‑लिखाई में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे उनके बच्चों को शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुरुआती प्रवेश मिला। यह सिर्फ शैक्षणिक मदद नहीं, बल्कि भावनात्मक मार्गदर्शन भी रहा।
विशेषज्ञ का विश्लेषण
काउंसलिंग मनोवैज्ञानिक अथुल राज ने बताया कि रिश्ते की शुरुआती चरण में सराहना नई‑नई अनुभूतियों, आकर्षण और तीव्र भावनाओं से आकार लेती है। समय के साथ काम‑दबाव, वित्तीय जिम्मेदारियों और पारिवारिक दायित्वों के कारण यह फोकस स्थिरता, भरोसे और भावनात्मक समर्थन की ओर बदल जाता है। “जब कोई साथी कठिनाई में भी स्थिर रहता है, तो वह रोमांस से अधिक गहरा बंधन बनाता है,” उन्होंने कहा।
पिता की भागीदारी का बच्चे पर असर
राज ने यह भी बताया कि जब पिता लगातार बच्चों के दैनिक जीवन में मौजूद रहता है, तो बच्चे में आत्मविश्वास और स्थिरता का निर्माण होता है। यह केवल पढ़ाई‑लिखाई में मदद नहीं, बल्कि होमवर्क, परीक्षा की चिंता या मित्रों के साथ टकराव जैसे सामान्य क्षणों में समर्थन देने से होता है। ऐसे बच्चे भविष्य में चुनौतियों को संभालने की क्षमता विकसित करते हैं।
व्यक्तिगत पहचान बनाये रखना क्यों जरूरी है
फराह ने यह भी उजागर किया कि शिरीष अपने लेखन, एआई सीखने और व्यक्तिगत शौकों को जारी रखता है। यह व्यक्तिगत समय न केवल उनके आत्म‑संतुलन को बनाये रखता है, बल्कि परिवार में ऊर्जा और ताजगी भी लाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब दोनों साथी अपने‑अपने शौक और रुचियों को पोषित करते हैं, तो रिश्ते में नई जिज्ञासा और जुड़ाव बना रहता है।
सारांश में, दो दशकों की शादी के बाद फराह खान ने प्रेम को रोमांस से भरोसे और सहयोग की ओर बदलते देखा। उनका अनुभव और मनोवैज्ञानिक की टिप्पणी यह दर्शाती है कि दीर्घकालिक संबंधों में स्थिरता, भावनात्मक समर्थन और सक्रिय पितृत्व ही सच्ची संतुष्टि की कुंजी है।