ओडिशा के एक बीटेक इंजीनियर ने 14 साल के कॉर्पोरेट करियर को अलविदा कहकर कृषि क्षेत्र में कदम रखा। अब उनका मशरूम उत्पादन केंद्र न केवल उन्हें लाखों की कमाई करा रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार भी पैदा कर रहा है।

  • विक्रमदेव मोहपात्रा ने 14 साल के आईटी करियर के बाद मशरूम फार्मिंग शुरू की।
  • प्रति माह 16-19 लाख रुपये का राजस्व और 10 लाख रुपये से अधिक का व्यक्तिगत लाभ।
  • मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के तहत 97 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी प्राप्त।
  • स्थानीय समुदाय के 24 लोगों (18 महिलाएं, 6 पुरुष) को रोजगार प्रदान किया।

ओडिशा के नबरंगपुर जिले के विक्रमदेव मोहपात्रा की कहानी आधुनिक भारत के ग्रामीण उद्यमिता के एक नए युग को दर्शाती है। एक बीटेक स्नातक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शीर्ष आईटी फर्मों में 14 साल बिताने के बाद, मोहपात्रा ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने एक व्यावसायिक मशरूम उत्पादन और प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की, जिसने उन्हें एक वेतनभोगी कर्मचारी से एक सफल उद्यमी में बदल दिया है।

यह उद्यम केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि सामाजिक प्रभाव का भी एक उदाहरण है। मोहपात्रा की इकाई वर्तमान में 18 महिलाओं और 6 पुरुषों को रोजगार दे रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है। उनकी सुविधा प्रतिदिन 500 से 600 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन करती है, जिसका अर्थ है कि मासिक उत्पादन लगभग 15 से 18 टन तक पहुंच जाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह बदलाव भारत में 'रिवर्स माइग्रेशन' और 'एग्री-टेक' के प्रति बढ़ते रुझान का संकेत है। जब उच्च शिक्षित युवा कृषि में तकनीकी विशेषज्ञता लाते हैं, तो पारंपरिक खेती एक लाभदायक उद्योग में बदल जाती है। यह मॉडल साबित करता है कि सरकारी सब्सिडी और सही व्यावसायिक रणनीति के साथ कृषि क्षेत्र आईटी क्षेत्र से अधिक लाभदायक हो सकता है।

"कृषि में तकनीकी शिक्षा का एकीकरण न केवल उत्पादकता बढ़ाता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव लाता है।"

वित्तीय विवरणों पर नजर डालें तो इस परियोजना में कुल 2.56 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसमें मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के तहत लगभग 97 लाख रुपये की महत्वपूर्ण सरकारी सब्सिडी शामिल थी। वर्तमान में, मशरूम की बिक्री दर 100-110 रुपये प्रति किलोग्राम है, जिससे मासिक राजस्व 16-19 लाख रुपये के बीच रहता है।

मोहपात्रा द्वारा उत्पादित मशरूम की आपूर्ति मुख्य रूप से ओडिशा के प्रमुख बाजारों जैसे ब्रह्मपुर और भुवनेश्वर में की जाती है। साल भर उत्पादन सुनिश्चित करने की उनकी रणनीति ने उन्हें बाजार में एक स्थिर पकड़ और निरंतर राजस्व प्रवाह प्रदान किया है। सोशल मीडिया पर उनकी इस यात्रा को काफी सराहना मिल रही है, जहाँ लोग इसे साहस और दृढ़ संकल्प का उदाहरण मान रहे हैं।

विवरण आईटी करियर (पूर्व) मशरुम फार्मिंग (वर्तमान)
भूमिका सॉफ्टवेयर इंजीनियर ग्रामीण उद्यमी
आय स्रोत मासिक वेतन व्यावसायिक राजस्व (₹16-19 लाख/माह)
प्रभाव व्यक्तिगत विकास सामुदायिक रोजगार सृजन
क्या आप जानते हैं?: मशरूम दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले कवक (fungi) में से एक हैं और इन्हें उगाने के लिए पारंपरिक फसलों की तरह बड़ी जमीन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विक्रमदेव मोहपात्रा के मशरूम फार्म को कितनी सरकारी सहायता मिली?
उत्तर: उन्हें मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के तहत लगभग 97 लाख रुपये की सब्सिडी मिली।

प्रश्न 2: इस फार्म से कितने लोगों को रोजगार मिला है?
उत्तर: इस इकाई में वर्तमान में 24 लोग कार्यरत हैं, जिनमें 18 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं।