असद शासन के पतन के बाद, सीरिया की नई सरकार इज़राइल के साथ सैन्य टकराव के बजाय कूटनीति का रास्ता चुन रही है। हालांकि, इज़राइल के निरंतर हमलों और दक्षिणी क्षेत्रों पर कब्जे ने इस शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है।
- सीरिया की नई सरकार ने इज़राइल के साथ सैन्य टकराव के बजाय शांतिपूर्ण कूटनीति को प्राथमिकता दी है।
- इज़राइल ने सीरियाई क्षेत्र में घुसपैठ जारी रखी है और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं।
- दमिश्क अपनी अर्थव्यवस्था और सेना के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका और तुर्की के समर्थन पर भरोसा कर रहा है।
बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद, सीरिया एक अत्यंत नाजुक मोड़ पर खड़ा है। देश के नए नेतृत्व ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है जो पिछले दशकों के विपरीत है: इज़राइल के साथ सीधा सैन्य मुकाबला करने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान खोजना। सीरियाई अधिकारियों का मानना है कि एक दशक से अधिक समय तक चले गृहयुद्ध के बाद, देश को अब युद्ध की नहीं, बल्कि स्थिरता और पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक रूप से, असद शासन के दौरान सीरिया ईरान के नेतृत्व वाले 'प्रतिरोध अक्ष' (Axis of Resistance) का हिस्सा था, जिसका उपयोग हिज़बुल्लाह जैसे समूहों को हथियार पहुँचाने के लिए किया जाता था। हालांकि, दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में आए नए शासन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य अपने पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करना है।
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि सीरिया की यह 'व्यावहारिकता' (Pragmatism) मजबूरी और रणनीति का मिश्रण है। एक टूटी हुई अर्थव्यवस्था और बिखर चुकी सेना के साथ, दमिश्क जानता है कि इज़राइल के साथ युद्ध का अर्थ आत्मघाती होगा। सीरिया अब खुद को ईरान के प्रभाव से दूर कर अमेरिका और खाड़ी देशों के करीब लाकर अपनी अंतरराष्ट्रीय वैधता बढ़ाना चाहता है।
"सीरिया की सरकार गहन रूप से व्यावहारिक है; वह राष्ट्रीय हित को बढ़ावा देने के लिए किसी के साथ भी बातचीत करने को तैयार है।" - रॉब गेइस्ट पिनफोल्ड, किंग्स कॉलेज लंदन।
इज़राइल का रुख इसके विपरीत रहा है। दक्षिणी सीरिया में चेकपॉइंट्स स्थापित करने से लेकर जुलाई 2025 में रक्षा मंत्रालय पर हमले तक, इज़राइल ने यह संकेत दिया है कि वह सीरिया की सैन्य क्षमता के किसी भी पुनरुद्धार को बर्दाश्त नहीं करेगा। हाल ही में अम्मान में मोसाद प्रमुख रोमन गोफमैन और सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शैबानी के बीच हुई बैठक इस तनाव के बीच शांति की एक ক্ষীণ उम्मीद जगाती है।
| विशेषता | असद शासन (पूर्व) | अल-शरा शासन (वर्तमान) |
|---|---|---|
| विदेश नीति | ईरान समर्थित 'प्रतिरोध अक्ष' | व्यावहारिक कूटनीति और क्षेत्रीय शांति |
| इज़राइल के साथ संबंध | प्रॉक्सी युद्ध और शत्रुता | बातचीत और सुरक्षा समझौतों की कोशिश |
| मुख्य सहयोगी | रूस, ईरान | तुर्की, अमेरिका, खाड़ी देश |
सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने स्वीकार किया है कि वे वर्तमान में इज़राइल पर भरोसा नहीं करते, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से बातचीत करना एक आवश्यकता है। दमिश्क की मुख्य मांगें इज़राइली हमलों को रोकने, नागरिकों की गिरफ्तारी बंद करने और कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने की हैं।
1. सीरिया इज़राइल के साथ शांति क्यों चाहता है?
सीरिया लंबे गृहयुद्ध से थक चुका है और अपनी अर्थव्यवस्था तथा बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए स्थिरता चाहता है।
2. क्या इज़राइल सीरिया की कूटनीति को स्वीकार कर रहा है?
इज़राइल ने बातचीत तो की है, लेकिन वह लगातार सैन्य हमलों और घुसपैठ के जरिए अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दे रहा है।