रोटरी ई-क्लब और बेंगलुरु पुलिस के सहयोग से 'टॉकिंग वॉल्स' परियोजना के तहत बाययप्पनहल्ली में एक नया भित्ति चित्र बनाया गया है, जो नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाता है।

  • 'टॉकिंग वॉल्स' परियोजना रोटरी ई-क्लब और बेंगलुरु सिटी पुलिस की एक संयुक्त पहल है।
  • कोलकाता के कलाकार सयम पोरे ने बाययप्पनहल्ली पुलिस स्टेशन की दीवार पर नशा मुक्ति का संदेश उकेरा है।
  • यह पहल पुलिस के 'बेड़ा ब्रो' (Beda Bro) अभियान को मजबूती प्रदान करती है।
  • लक्ष्य बेंगलुरु में 50 से अधिक दीवारों पर सामाजिक जागरूकता फैलाना है।

बेंगलुरु के व्यस्त ओल्ड मद्रास रोड पर स्थित बाययप्पनहल्ली पुलिस स्टेशन की दीवारों पर अब केवल कानून के नियम ही नहीं, बल्कि कला के माध्यम से सामाजिक सुधार के संदेश भी दिखाई देंगे। 'टॉकिंग वॉल्स' नामक एक नई पहल के तहत, रोटरी ई-क्लब ऑफ बेंगलुरु और बेंगलुरु सिटी पुलिस ने मिलकर एक प्रभावशाली भित्ति चित्र (mural) तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशीली दवाओं के सेवन से बचाना है।

इस कलात्मक परियोजना की प्रेरणा बेल्जियम के गेन्ट शहर की गलियों से मिली, जहाँ दीवारों पर बने ग्राफिटी ने निवेदिता दत्त (रोटरी ई-क्लब की निदेशक) को प्रभावित किया था। 2024 में 'ग्राफिटी फॉर होप' के साथ शुरू हुआ यह सफर अब नशा मुक्ति के गंभीर मुद्दे की ओर मुड़ गया है। कोलकाता के प्रसिद्ध कलाकार सयम पोरे ने इस दीवार पर रंगों और प्रतीकों के माध्यम से नशे के विनाशकारी प्रभावों को दर्शाया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि पारंपरिक विज्ञापनों की तुलना में सड़क पर बनी कला (Street Art) लोगों के मानस पर गहरा प्रभाव डालती है। जहाँ बिलबोर्ड्स अक्सर व्यावसायिक लगते हैं, वहीं भित्ति चित्र राहगीरों के साथ एक सहज संवाद स्थापित करते हैं। यह परियोजना न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि पुलिस की 'बेड़ा ब्रो' मुहिम को एक दृश्य पहचान भी प्रदान करती है, जिसका लक्ष्य 2028 तक शहर को नशा मुक्त बनाना है।

कला के माध्यम से संदेश देने से लोग उसे अधिक सहजता से स्वीकार करते हैं, क्योंकि यह व्यावसायिक विज्ञापन जैसा नहीं लगता।

इस भित्ति चित्र में नीले, मैजेंटा और सुनहरे रंगों का सुंदर संयोजन है। इसमें पुलिस का लोगो, हथकड़ी, एक बड़ी सिरिंज, एक आंख और एक जंजीरों में जकड़ा हुआ कंकाल जैसे प्रतीकों का उपयोग किया गया है। इसके साथ ही कन्नड़ और अंग्रेजी में 'Beda Bro' (नशा मत करो भाई) जैसे नारे लिखे गए हैं, जो सीधे तौर पर युवाओं को चेतावनी देते हैं।

कलाकार सयम पोरे का मानना है कि ग्राफिटी को अक्सर तोड़फोड़ माना जाता है, लेकिन इस तरह के कार्यों से लोगों का नजरिया बदल सकता है। यह पहली बार है जब किसी कलाकार ने पुलिस स्टेशन की दीवार को अपनी कला का कैनवास बनाया है। रोटरी ई-क्लब का अगला लक्ष्य इस अभियान को बड़े पैमाने पर ले जाना है और बेंगलुरु की लगभग 50 दीवारों को सामाजिक संदेशों से सजाना है।

Frequently Asked Questions

1. 'बेड़ा ब्रो' (Beda Bro) अभियान क्या है?
यह बेंगलुरु पुलिस की एक सामाजिक जागरूकता पहल है जिसका उद्देश्य युवाओं को नशीली दवाओं के जाल से बाहर निकालना है।

2. इस भित्ति चित्र को किसने बनाया है?
इसे कोलकाता के कलाकार सयम पोरे ने रोटरी ई-क्लब और बन्ना पेंट कंपनी के सहयोग से बनाया है।

Did You Know?: ग्राफिटी को अक्सर अपराध माना जाता है, लेकिन 'टॉकिंग वॉल्स' जैसी परियोजनाएं इसे सामाजिक सुधार का एक शक्तिशाली माध्यम बनाती हैं।