प्रसिद्ध संवहनी सर्जन डॉ. जे. अमालोरपवनथन ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए चिंताद्रिपेट की गलियों, पुराने चर्च और चेन्नई की बदलती संस्कृति का एक सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया है।

  • डॉ. जे. अमालोरपवनथन ने अपने बचपन के दिनों और चिंताद्रिपेट के सांस्कृतिक महत्व को साझा किया।
  • उन्होंने पुराने चेन्नई के सामाजिक ताने-बाने, खेल और स्थानीय खान-पान का वर्णन किया।
  • लेख में चर्च की घंटियों से लेकर स्थानीय खेलों तक की पुरानी यादों को संजोया गया है।

प्रसिद्ध संवहनी सर्जन और राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य, डॉ. जे. अमालोरपवनथन ने हाल ही में अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए चेन्नई के एक पुराने और जीवंत दौर की झलक पेश की है। उनके संस्मरणों के अनुसार, उनका जन्म और पालन-पोषण चेन्नई के ऐतिहासिक क्षेत्र चिंताद्रिपेट में हुआ था, जो शहर के प्रमुख केंद्रों के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिकोण का हिस्सा था।

डॉ. अमालोरपवनथन की सबसे शुरुआती यादें उनके घर के सामने स्थित चर्च से जुड़ी हैं। वे उस विशाल चर्च की घंटियों की गूंज, सुबह 6:30 बजे की प्रार्थना और चर्च के पुराने संगीत वाद्ययंत्रों को आज भी महसूस कर सकते हैं। उन्होंने उस दौर का भी जिक्र किया जब चर्च में लैटिन अनुष्ठान धीरे-धीरे तमिल भाषा में परिवर्तित हो रहे थे, जो उस समय के सांस्कृतिक संक्रमण का प्रतीक था।

बचपन के खेल और सामाजिक जीवन

बचपन की यादों में केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि पेरियामेट की गलियों में खेले जाने वाले खेल भी शामिल हैं। उन्होंने कबड्डी, वॉलीबॉल, फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों के साथ-साथ 'पम्बराम' (लट्टू) घुमाने के रोमांच को भी याद किया। उन्होंने उल्लेख किया कि पेरियामेट की अनसार भाई की दुकान से लट्टू खरीदना उस समय एक गर्व की बात हुआ करती थी।

खेलों के प्रति उनके लगाव का एक दिलचस्प किस्सा विश्व चैंपियन वी. लाजर के साथ कैरम खेलने से जुड़ा है। हालांकि डॉ. अमालोरपवनथन ने उनके साथ खेलते हुए कभी कोई अंक नहीं बनाया, लेकिन नेशनल दरबार में 'बन बटर जैम' और चाय के लिए की जाने वाली छोटी-मोटी बाजी उनके बचपन का एक अभिन्न हिस्सा थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के व्यक्तिगत संस्मरण केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं हैं, बल्कि वे शहरी विकास और सांस्कृतिक परिवर्तन के ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। डॉ. अमालोरपवनथन का विवरण दिखाता है कि कैसे एक समुदाय की पहचान उसके स्थानीय चर्चों, स्कूलों और सामुदायिक खेल के मैदानों से बनती है।

पुराने चेन्नई की यादें केवल अतीत का मोह नहीं हैं, बल्कि वे उस सामाजिक सामंजस्य का प्रमाण हैं जो आज के महानगरीय जीवन में कहीं खो गया है।

उनके स्कूल के दिनों की बात करें तो चिंताद्रिपेट हाई स्कूल की यादें भी उनके मन में ताजा हैं। उन्होंने विशेष दिनों पर स्कूल के सामने मिलने वाली 10 पैसे की 'रीटा आइसक्रीम' का भी जिक्र किया, जो उस दौर की सादगी और खुशी का प्रतीक थी।

अंत में, डॉ. अमालोरपवनथन ने इस शहर के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इसी शहर ने उन्हें वह सब कुछ दिया, जिसने उन्हें एक सफल संवहनी सर्जन बनने में मदद की।

Did You Know?: पुराने चेन्नई के कई इलाके अब पूरी तरह से आधुनिक हो चुके हैं, लेकिन उनकी ऐतिहासिक वास्तुकला आज भी उनके समृद्ध अतीत की गवाही देती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डॉ. जे. अमालोरपवनथन कौन हैं?
उत्तर: वे एक प्रसिद्ध संवहनी सर्जन और राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य हैं।

प्रश्न 2: उनके संस्मरण का मुख्य केंद्र क्या है?
उत्तर: उनके संस्मरण का मुख्य केंद्र चेन्नई का चिंताद्रिपेट क्षेत्र और वहां का बचपन है।