मंगलुरु में डॉ. पल्लथडका केशव भट्ट मेमोरियल ट्रस्ट और दत्तम आयुधर्लमा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क योग और प्राणायाम कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस कार्यक्रम में बुजुर्गों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के प्रबंधन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्य बातें

  • डॉ. पल्लथडका केशव भट्ट मेमोरियल ट्रस्ट और दत्तम आयुधर्लमा द्वारा संयुक्त आयोजन।
  • 90 वर्षीय योगचार्य शंकरानारायण शास्त्री द्वारा प्रशिक्षण।
  • मधुमेह, उच्च रक्तचाप और थायराइड प्रबंधन पर विशेष ध्यान।
  • व्यक्तिगत परामर्श सत्रों का भी आयोजन किया गया।

मंगलुरु: स्थानीय आयुधर्लमा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क योग और प्राणायाम कार्यशाला शुक्रवार को संपन्न हो गई। यह विशेष कार्यक्रम डॉ. पल्लथडका केशव भट्ट मेमोरियल ट्रस्ट और दत्तम आयुधर्लमा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करना था।

इस कार्यशाला का नेतृत्व प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ योगचार्य शंकरानारायण शास्त्री ने किया। उल्लेखनीय है कि शास्त्री जी स्वयं एक नब्बे वर्षीय योग साधक हैं, जो अपने अनुभव से वृद्धों को जीवन जीने की कला सिखा रहे हैं। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न महत्वपूर्ण आसनों और प्राणायाम तकनीकों का गहन प्रशिक्षण दिया गया।

स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष जोर

कार्यशाला का मुख्य केंद्र बिंदु वृद्धावस्था में होने वाली आम स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान था। प्रतिभागियों को विशेष रूप से मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension) और थायराइड (Thyroid) जैसी स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी योग मुद्राओं के बारे में बताया गया।

योग केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में शरीर और मन के बीच संतुलन बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, इस तरह के सामुदायिक कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि सामाजिक अलगाव से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिकों को एक मंच प्रदान करते हैं। कार्यशाला के अंत में, प्रतिभागियों को योगचार्य के साथ वन-ऑन-वन (one-on-one) परामर्श प्राप्त करने का अवसर भी मिला, जहाँ उन्हें उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुसार सलाह दी गई।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में योग की परंपरा सदियों पुरानी है, और हाल के वर्षों में 'आयुष' (AYUSH) मंत्रालय के प्रयासों से वृद्धों के लिए योग को एक निवारक चिकित्सा पद्धति के रूप में व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: प्राणायाम के माध्यम से नियंत्रित श्वसन क्रिया हृदय गति को स्थिर करने और तनाव को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को योग के माध्यम से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन में मदद करना था।

2. प्रशिक्षण कौन दे रहा था?
प्रशिक्षण 90 वर्षीय योगचार्य शंकरानारायण शास्त्री द्वारा दिया जा रहा था।