महाराष्ट्र सरकार ने उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए केवल ऑनलाइन समाचार पत्र प्राप्त करने के फैसले को पलट दिया है। अब मंत्री अपनी सुविधा के अनुसार प्रिंट या ऑनलाइन दोनों में से किसी भी माध्यम को चुन सकते हैं।
मुख्य बातें
- महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के लिए प्रिंट अखबारों का विकल्प फिर से बहाल किया।
- उप मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्य मंत्री अब अपनी सुविधा अनुसार प्रिंट या डिजिटल माध्यम चुन सकते हैं।
- यह निर्णय 30 जुलाई के पिछले सरकारी प्रस्ताव (GR) में संशोधन के बाद लिया गया।
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए अपने उस फैसले को आंशिक रूप से वापस ले लिया है, जिसमें उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए प्रिंट समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया था। अब मंत्रियों को अपनी पसंद के अनुसार डिजिटल या भौतिक (प्रिंट) समाचार पत्र चुनने की पूरी आजादी होगी।
गौरतलब है कि 30 जुलाई को जारी एक सरकारी प्रस्ताव (GR) के माध्यम से सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने घोषणा की थी कि 1 सितंबर से मंत्रियों को केवल ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन पर निर्भर रहना होगा। इस निर्णय के बाद प्रशासनिक गलियारों में काफी चर्चा हुई थी। हालांकि, अब संशोधित आदेश के अनुसार, मंत्रियों को अब 'ऑनलाइन या प्रिंट सब्सक्रिप्शन, या जो भी सुविधाजनक हो' चुनने की अनुमति दी गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव न केवल प्रशासनिक सुविधा से जुड़ा है, बल्कि यह सूचना के पारंपरिक माध्यमों के महत्व को भी दर्शाता है। मंत्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचनाओं तक त्वरित और विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित करना शासन की दक्षता के लिए आवश्यक है।
डिजिटल क्रांति के बावजूद, नीतिगत निर्णयों के लिए प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता और सुगमता अभी भी अपरिहार्य है।
इससे पहले, सरकार ने तर्क दिया था कि समाचार पत्रों और पत्रिकाओं पर होने वाला वार्षिक खर्च लगभग ₹22 लाख है। मूल निर्णय के तहत, मंत्रियों को अपने संबंधित प्रशासनिक विभागों के माध्यम से बिल जमा करके ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन का खर्च उठाना था। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए प्रिंट माध्यम की सुविधा को पहले ही बरकरार रखा गया था, जिसे अब अन्य मंत्रियों के लिए भी विस्तारित कर दिया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सरकारी कामकाज में सूचना के प्रसार के लिए हमेशा से प्रिंट मीडिया का दबदबा रहा है। हाल के वर्षों में 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत सरकारी विभागों में पेपरलेस कामकाज को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है, लेकिन महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए सूचना की निरंतरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या अब मंत्रियों को प्रिंट अखबारों का खर्च खुद उठाना होगा?
नहीं, संशोधित नियमों के अनुसार वे अपनी सुविधा के अनुसार माध्यम चुन सकते हैं और संबंधित विभाग के खर्च से इसे पूरा कर सकते हैं।
2. यह नया नियम कब से लागू होगा?
यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू है और पिछले आदेश के प्रभाव को कम करता है।