नासिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव के खिलाफ हजारों प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग को जाम कर दिया। इस दौरान कांग्रेस नेता के भतीजे और MLC सत्यजीत तांबे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
मुख्य बातें
- प्रदर्शनकारी शिर्डी के बजाय संगमनेर और नारायणगांव मार्ग की मांग कर रहे हैं।
- MLC सत्यजीत तांबे को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया।
- सरकार ने तकनीकी मुद्दों के अध्ययन के लिए डॉ. अनिल काकोडकर के नेतृत्व में समिति बनाई है।
- मूल मार्ग के लिए ₹500 करोड़ से अधिक का भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है।
नासिक-पुणे राजमार्ग पर रविवार को भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां हजारों प्रदर्शनकारियों ने यातायात को पूरी तरह बाधित कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार प्रस्तावित नासिक-पुणे सेमी-हाई-स्पीड रेलवे मार्ग को शिर्डी के माध्यम से बदलने के बजाय, मूल रूप से प्रस्तावित संगमनेर और नारायणगांव मार्ग पर ही बनाए रखे।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात के भतीजे और MLC सत्यजीत तांबे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तांबे ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक जन आंदोलन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल मार्ग में किसी भी प्रकार का बदलाव स्वीकार्य नहीं होगा।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद बुनियादी ढांचे के विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच संतुलन का एक क्लासिक उदाहरण है। रेलवे का नया प्रस्तावित मार्ग GMRT (Giant Metrewave Radio Telescopes) सुविधा के पास से गुजरता है, जिससे रेडियो तरंगों में हस्तक्षेप होने की आशंका है। हालांकि, विरोधकारियों का तर्क है कि मूल मार्ग के लिए पहले ही ₹500 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है, जिससे मार्ग बदलना आर्थिक रूप से नुकसानदेह होगा।
"मूल मार्ग में बदलाव न केवल जनता के विश्वास को तोड़ेगा, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी निवेश को भी संकट में डाल सकता है।"
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तकनीकी समस्या के समाधान के लिए पूर्व परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस समय सीमा को किसी भी स्थिति में बढ़ाया न जाए और हर तालुका में जन संवाद आयोजित किया जाए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नासिक-पुणे रेलवे परियोजना लंबे समय से क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी रही है। मूल योजना में नारायणगांव स्टेशन को शामिल किया गया था, लेकिन वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा रेडियो हस्तक्षेप की चिंताओं के बाद शिर्डी के माध्यम से एक वैकल्पिक मार्ग का प्रस्ताव दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: प्रदर्शनकारी किस मार्ग की मांग कर रहे हैं?
उत्तर: प्रदर्शनकारी संगमनेर और नारायणगांव वाले मूल प्रस्तावित मार्ग की मांग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: विवाद का मुख्य तकनीकी कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारण GMRT रेडियो टेलीस्कोप सुविधा के साथ संभावित हस्तक्षेप का डर है।