महाराष्ट्र के अमरावती स्थित सरकारी मातृत्व अस्पताल के NICU में वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद लगी भीषण आग में तीन नवजात शिशुओं की जान चली गई। इस हृदयविदारक घटना ने अस्पताल की अग्नि सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • अमरावती के सरकारी मातृत्व अस्पताल के NICU में वेंटिलेटर में विस्फोट के कारण आग लगी।
  • इस दुखद हादसे में तीन नवजात शिशुओं की मृत्यु हो गई, जबकि 36 अन्य को सुरक्षित बचाया गया।
  • प्रारंभिक जांच के अनुसार, वेंटिलेटर में तकनीकी खराबी से आग भड़की थी।
  • महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है।

महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित जिला महिला अस्पताल से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। 24 अगस्त की तड़के सुबह, अस्पताल के तीसरे तल पर स्थित स्पेशल नवजात देखभाल इकाई (SNCU) और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में अचानक विस्फोट हुआ, जिससे भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में तीन मासूम नवजात शिशुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी, जबकि 36 अन्य शिशुओं को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बचा लिया गया।

पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्वप्निल बोर्दे, जिन्होंने अपना इकलौता बच्चा खो दिया, ने अत्यंत पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि चार साल के इंतजार के बाद उन्हें यह खुशी मिली थी, लेकिन अब सब कुछ राख हो गया। अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट अमोल नरोटे के अनुसार, आग लगने के दौरान दो शिशुओं को मामूली जलन की चोटें भी आईं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आग का मुख्य कारण एक वेंटिलेटर में हुआ विस्फोट था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में सुरक्षा ऑडिट की भारी कमी को उजागर करती है। अमरावती का यह अस्पताल न केवल जिले के लिए, बल्कि वर्धा, यवतमाल और वाशिम जैसे पड़ोसी जिलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है। एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न होना भविष्य में बड़े संकट का संकेत है।

अस्पताल के भीतर वेंटिलेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें स्पष्ट विफलता देखी गई है।

घटना के बाद महाराष्ट्र के लोक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड, AIIMS और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के अधिकारी शामिल हैं। समिति को वेंटिलेटर की खराबी, बिजली की गड़बड़ी और अग्नि सुरक्षा ऑडिट के इतिहास की जांच करने का निर्देश दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह अस्पताल, जिसे पहले डफरिन अस्पताल के नाम से जाना जाता था, 1938 में स्थापित किया गया था। इसका नाम लेडी हैरियट डफरिन के सम्मान में रखा गया था, जिन्होंने भारत में महिलाओं को चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए 'डफरिन फंड' की स्थापना की थी। दशकों से यह अस्पताल क्षेत्र की महिलाओं के लिए भरोसे का प्रतीक रहा है, लेकिन इस हादसे ने उस भरोसे को झकझोर दिया है।

Did You Know?: डफरिन फंड की स्थापना 1884 में महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए की गई थी, जिसने आधुनिक भारत में मातृ स्वास्थ्य की नींव रखी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आग लगने का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
उत्तर: प्रारंभिक जांच के अनुसार, NICU में एक वेंटिलेटर में विस्फोट होने के कारण आग लगी थी।

प्रश्न 2: सरकार ने पीड़ितों के लिए क्या सहायता की घोषणा की है?
उत्तर: महाराष्ट्र सरकार ने मृतक शिशुओं के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।