विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी और कमजोर अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपया 5 पैसे बढ़कर 95.77 पर पहुंच गया है। घरेलू शेयर बाजारों में तेजी ने भी मुद्रा को मजबूती प्रदान की है।
मुख्य बातें
- भारतीय रुपया 5 पैसे बढ़कर 95.77 के स्तर पर पहुंच गया।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों की खरीदारी शुरू की है।
- अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने रुपये को सहारा दिया।
बुधवार (29 जुलाई, 2026) को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे की बढ़त के साथ 95.77 पर कारोबार कर रहा है। यह लगातार चौथे दिन मुद्रा में मजबूती का संकेत है, जिसे कमजोर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से समर्थन मिला है।
विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, घरेलू इक्विटी बाजार में सकारात्मक माहौल ने रुपये को काफी सहारा दिया है। विशेष रूप से, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयरों की सक्रिय खरीदारी ने बाजार में विश्वास जगाया है। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 95.70 पर खुला और बाद में 95.77 पर पहुंच गया।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि रुपये की यह मजबूती केवल बाजार की लहर नहीं है, बल्कि वैश्विक कारकों और घरेलू निवेश प्रवाह का एक जटिल संयोजन है। जब FIIs भारतीय बाजार में पैसा लगाते हैं, तो इससे रुपये की मांग बढ़ती है, जिससे मुद्रा मजबूत होती है।
विदेशी पूंजी का प्रवाह और डॉलर की कमजोरी भारतीय मुद्रा के लिए एक सकारात्मक 'विंडो' बना रही है।
वैश्विक स्तर पर, डॉलर इंडेक्स जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.12% गिरकर 101.14 पर कारोबार कर रहा है। यह गिरावट फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति घोषणाओं से पहले देखी जा रही है। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारतीय बाजार में Sensex और Nifty में महत्वपूर्ण उछाल देखा गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ सत्रों में रुपया काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। मंगलवार को रुपया 17 पैसे की बढ़त के साथ 95.82 पर बंद हुआ था। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जो सीधे तौर पर भारत जैसे तेल आयातक देश की मुद्रा को प्रभावित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. रुपये के बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
FIIs द्वारा भारतीय शेयरों की खरीदारी और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी मुख्य कारण हैं।
2. डॉलर इंडेक्स क्या है?
यह छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापने वाला सूचकांक है।