तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम (TTD) ने अपने तीन प्रमुख अस्पतालों के लिए चिकित्सा आपूर्ति हेतु पात्रता मानदंडों को कम कर दिया है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। नए नियमों के तहत टर्नओवर की सीमा को काफी कम कर दिया गया है।

मुख्य बातें

  • TTD ने तीन बड़े अस्पतालों के लिए चिकित्सा आपूर्ति हेतु टर्नओवर सीमा को大幅 कम किया है।
  • दवाओं के लिए न्यूनतम टर्नओवर ₹100 करोड़ से घटाकर ₹25 करोड़ किया गया।
  • सर्जिकल और मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए सीमा ₹15 करोड़ निर्धारित की गई है।
  • बहु-विक्रेता (Multi-vendor) प्रणाली को जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम (TTD) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए अपने तीन प्रमुख अस्पतालों के लिए चिकित्सा आपूर्ति हेतु बोलीदाताओं (bidders) के लिए पात्रता मानदंडों में ढील दी है। यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता बढ़ाने और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

TTD वर्तमान में तिरुपति स्थित तीन विशिष्ट चिकित्सा संस्थानों का प्रबंधन करता है: श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ सर्जरी, रिसर्च एंड रिहैबिलिटेशन फॉर द डिसेबल्ड (BIRRD), श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SVIMS), और श्री पद्मावती चिल्ड्रन्स हार्ट सेंटर (SPCHC)। इन संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल प्रदान की जाती है, जिसके लिए निरंतर और सुचारू आपूर्ति अनिवार्य है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पुराने मानदंड अत्यधिक सख्त थे, जिससे केवल बड़े कॉरपोरेट खिलाड़ी ही टेंडर प्रक्रिया में भाग ले पा रहे थे। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो रही थी और आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम बना रहता था। पात्रता मानदंडों को कम करने से अब छोटे और मध्यम स्तर के निर्माता और वितरक भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे, जिससे लागत में कमी और आपूर्ति की निरंतरता बढ़ने की संभावना है।

पात्रता मानदंडों में यह कमी चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक समावेशी और प्रतिस्पर्धी बनाएगी।

नए पात्रता मानदंड: एक तुलना

आइटम का प्रकारपुरानी टर्नओवर सीमानई टर्नओवर सीमा
दवाएं और इंजेक्शन₹100 करोड़₹25 करोड़
सर्जिकल और मेडिकल कंज्यूमेबल्स₹100 करोड़₹15 करोड़

यह निर्णय एक विशेष समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसकी अध्यक्षता BIRRD के निदेशक ने की थी। समिति ने सुझाव दिया कि 'मल्टी-वेंडर प्रोक्योरमेंट सिस्टम' को जारी रखा जाना चाहिए। इस प्रणाली के तहत, यदि सबसे कम बोली लगाने वाला (L1) विफल रहता है, तो L2 और L3 बोलीदाताओं से भी उसी दर पर सामान लिया जा सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

टीटीडी सदियों से तिरुपति के धार्मिक और सामाजिक कार्यों का संरक्षक रहा है। इसके चिकित्सा संस्थान दक्षिण भारत में विशेषज्ञ उपचार के प्रमुख केंद्र हैं, जो लाखों तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सेवाएं प्रदान करते हैं।

क्या आप जानते हैं?: TTD के अस्पताल न केवल तीर्थयात्रियों बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी उच्च स्तरीय और सस्ती चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. किन अस्पतालों पर यह नया नियम लागू होगा?
यह नियम BIRRD, SVIMS और SPCHC पर लागू होगा।

2. टर्नओवर सीमा घटाने का मुख्य लाभ क्या है?
इससे अधिक विक्रेताओं को मौका मिलेगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से TTD को बेहतर दरें मिलेंगी।