गुजरात में 14 घंटे में 400 mm से अधिक बारिश का मुख्य कारण पैसिफिक डिकेडल ऑसीलेशन (PDO) का नेगेटिव फेज था, जो अल‑नीनो की अपेक्षा अधिक प्रभावी रहा। वैज्ञानिकों को इस लंबी‑अवधि के पैटर्न को मॉडल में शामिल करने की चुनौती का सामना करना पड़ा।

वीडियो लोड हो रहा है...

मुख्य बिंदु

  • नेगेटिव PDO ने गुजरात में भारी बारिश को बढ़ावा दिया।
  • अल‑नीनो की अपेक्षा PDO का प्रभाव अधिक था।
  • भविष्य के मौसम‑पूर्वानुमानों में PDO को बेहतर तरीके से शामिल करने की जरूरत है।

PDO की वैज्ञानिक परिभाषा

पैसिफिक डिकेडल ऑसीलेशन (PDO) प्रशांत महासागर की सतही जल तापमान में दशकीय (20‑30 साल) चक्रों के आधार पर उत्पन्न होने वाला जलवायु पैटर्न है। यह दो फेज में रहता है: सकारात्मक (उत्तरी‑पूर्वी भाग गर्म) और नकारात्मक (उत्तरी‑पूर्वी भाग ठंडा)। 2026 में PDO का इंडेक्स –1.3 से –1.6 के बीच नेगेटिव फेज में दर्ज किया गया, जिससे भारतीय मॉनसून की तीव्रता बढ़ी।

गुजरात में असाधारण वर्षा

जुलाई‑24 को केवल 14 घंटे में चिखली (451 mm), ढोलका (440 mm), खेरगाम (431 mm) और उमरपाड़ा (405 mm) जैसे क्षेत्रों में रिकॉर्ड स्तर की बारिश हुई। नदियों का जलस्तर उफान पर, सड़कों पर पानी, और कई गांव बाढ़ से डूबे। यह सामान्य मॉनसून से कहीं अधिक विनाशकारी था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that overlooking long‑term drivers like PDO can lead to systematic under‑prediction of extreme events, jeopardizing disaster‑management planning and agricultural forecasts across western India.

"नेगेटिव PDO का समग्र वायुमंडलीय प्रवाह भारतीय मॉनसून को सुपर‑इंटेंस बनाता है, जो अल‑नीनो की अपेक्षा अधिक प्रभाव डालता है," कहा जलवायु विशेषज्ञ डॉ. अनीता रॉय ने।
Did You Know?: पिछले दो दशकों में नेगेटिव PDO अवधि में भारत के औसत वार्षिक वर्षा में 12 % की वृद्धि दर्ज हुई है।

Frequently Asked Questions

PDO और ENSO में क्या अंतर है? PDO दशकीय पैटर्न पर काम करता है, जबकि ENSO (अल‑नीनो/ला‑नीना) कुछ महीनों से दो साल तक रहता है।

क्या भविष्य में इस प्रकार की बाढ़ को रोका जा सकता है? मॉडलिंग में PDO को सही ढंग से शामिल करने से सटीक पूर्वानुमान संभव है, जिससे समय पर निकासी और चेतावनी प्रणाली को सक्रिय किया जा सकेगा।