अहिल्यानगर, महाराष्ट्र के 19‑साल के मेडिकल आकांक्षी ने NEET‑UG री‑एग्जाम में कट‑ऑफ़ से 11 अंक कम रहने पर आत्महत्या की। परिवार ने परीक्षा में अनियमितताओं और बढ़ते दबाव को कारण बताया।
मुख्य बिंदु
- NEET‑UG री‑एग्जाम में केवल 166 अंक, कट‑ऑफ़ से 11 अंक कम।
- किशोर ने परिवार को दोष न देने का अंतिम नोट लिखा।
- घटना ने राष्ट्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ प्रकट हुई, जो NEET विवाद से जुड़ी थी।
घटना की विस्तृत जानकारी
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में 19‑साल की मेडिकल aspirant, अंकिता सिंगाले, शनिवार को अपने घर पर लटकी हुई पाई गई। पुलिस ने मामले की जाँच दर्ज कर ली है और एक विशेष जांच टीम को नियुक्त किया गया है।
परिवार का बयान
परिवार ने बताया कि वह मई में आयोजित मूल NEET‑UG परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी थी, परन्तु जून 21 को हुई री‑एग्जाम में केवल 166 अंक प्राप्त कर पाई, जिससे वह कट‑ऑफ़ से 11 अंक कम रही। यह परिणाम उसके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर गया।
परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप
उसके पिता ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा में रिपोर्ट की गई अनियमितताओं ने तनाव को और बढ़ा दिया। इस तनाव के कारण उसने लगातार चिंता और अवसाद का सामना किया, जिसके बाद वह आत्महत्या का विकल्प चुन ली।
स्वयं लिखा अंतिम नोट
एक आत्महत्या नोट में उसने परिवार से कहा, “माँ‑पिता, आपने मुझे इतना प्यार दिया, पर मैं आपकी एक भी इच्छा पूरी नहीं कर सकी। कृपया मुझे माफ़ कर देना। आप में से कोई भी मेरी मृत्यु का कारण नहीं है।” उसने अपने सपनों के लिए किए गए बड़े बलिदान को भी उजागर किया।
वृहद राष्ट्रीय संदर्भ
इसी दिन राष्ट्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET‑UG विवाद के चलते देशव्यापी विरोध के बाद इस्तीफा दे दिया। यह घटना देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा को तीव्र कर रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
NEET (National Eligibility cum Entrance Test) भारत में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एकमात्र राष्ट्रीय परीक्षा है। हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए तैयारी करते हैं, और कट‑ऑफ़ अंक अक्सर जीवन‑परिवर्तनकारी होते हैं। इस दबाव ने कई बार छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia analysis shows that the rising wave of exam‑related suicides is a stark indicator of systemic failures in student counselling and examination governance across India.
“परीक्षा‑संबंधी तनाव को कम करने के लिए स्कूलों और बोर्डों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता के अनिवार्य प्रोटोकॉल अपनाने चाहिए,” कहते हैं मनोवैज्ञानिक डॉ. रवीना सिंह।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: NEET‑UG में कट‑ऑफ़ अंक कैसे निर्धारित होते हैं?
उत्तर: कट‑ऑफ़ अंक प्रत्येक वर्ष परीक्षा की कठिनाई, कुल उम्मीदवारों की संख्या और उपलब्ध सीटों के आधार पर तय होते हैं।
प्रश्न 2: यदि छात्र को परीक्षा‑संबंधी तनाव हो तो कौन‑सी सहायता उपलब्ध है?
उत्तर: अधिकांश शैक्षणिक संस्थान काउंसलिंग सेंटर, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (1800‑599‑0019) और कई NGOs से सहयोग प्रदान करते हैं।