ग्लासगो में आयोजित 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धंकर ने इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक जीता, जबकि शिल्पा कांचुगरकोप्पालु श्याला को ब्रॉन्ज़ मिला, जिससे भारत को पैर एथलेटिक्स में प्रथम दोहरा पोडियम मिला। यह जीत दो दशकों के इंतज़ार के बाद आई।

मुख्य बिंदु

  • शर्मिला धंकर ने F57 शॉटपुट में 9.81 मीटर की सीज़न‑बेस्ट उछाल से स्वर्ण जीता।
  • शिल्पा कांचुगरकोप्पालु श्याला को परिणाम सुधार के बाद ब्रॉन्ज़ मिला, जिससे भारत को पहला दोहरा पैर एथलेटिक्स पोडियम मिला।
  • यह जीत 2006 से चली आ रही 20‑साल की प्रतीक्षा को समाप्त करती है।

ग्लासगो, 28 जुलाई 2026 – 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धंकर ने महिला F57 शॉटपुट में 9.81 मीटर की उछाल कर भारत का पहला पैर एथलेटिक्स स्वर्ण पदक सुरक्षित किया। यह जीत न केवल व्यक्तिगत सफलता थी, बल्कि 20 साल बाद भारत को इस वर्ग में पहला स्वर्ण दिलाने वाली घटना भी थी।

शर्मिला की जीत के कुछ ही मिनट बाद, टीम की साथी शिल्पा कांचुगरकोप्पालु श्याला को प्रारंभिक रूप से चौथे स्थान पर रखा गया था। लेकिन आधिकारिक पुनर्मूल्यांकन के बाद नाइजीरिया की यूचरिया इयाज़ी का निशान ‘नो‑मार्क’ घोषित किया गया, जिससे शिल्पा को ब्रॉन्ज़ पदक मिला। इस अप्रत्याशित मोड़ ने भारत को पैर एथलेटिक्स में पहला दोहरा पोडियम हासिल कराया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this double podium not only lifts the morale of Indian para‑athletes but also signals a turning point for greater investment and visibility in para‑sports across the sub‑continent.

"शर्मिला की जीत भारत की पैर एथलेटिक्स की संभावनाओं का नया अध्याय लिखती है," कहा एशिया पैरा एथलेटिक्स के पूर्व कोच ने।

Historical Background

भारत ने 2006 के एथेन्स कॉमनवेल्थ गेम्स में आखिरी बार पैर एथलेटिक्स में पदक जीता था, जब सविता सिंह ने डिस्कस में कांस्य जीता था। इसके बाद दो दशकों तक कोई पैर एथलेटिक्स पदक नहीं मिला, जिससे इस जीत का महत्व और अधिक बढ़ गया।

Did You Know?: शर्मिला ने केवल दो साल बाद ही राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा।

Frequently Asked Questions

Q1: शर्मिला धंकर ने किस कोच की मदद से यह जीत हासिल की?
A: उन्होंने कोच टेक चंद की देखरेख में प्रशिक्षण लिया।

Q2: शिल्पा श्याला की ब्रॉन्ज़ कैसे मिली?
A: आधिकारिक पुनरावलोकन में नाइजीरिया की एथलीट का निशान हटाया गया, जिससे शिल्पा को तीसरा पदक मिला।