केरल राज्य में गावी मार्ग पर लगातार बस टूटने और भीड़भाड़ को देखते हुए केएसआरटीसी ने अपने प्रीयदर्शिनी सेवा में यात्रियों की सीमा 55 तक घटा दी है। यह कदम यात्रियों को जंगल के गहराई में फँसने से बचाने हेतु लिया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केएसआरटीसी ने गावी मार्ग पर 55 यात्रियों की सीमा रखी।
  • लगातार बस टूटने से यात्रियों को जंगल के भीतर फँसने का जोखिम बढ़ा।
  • अतिरिक्त बसें जोड़ने के लिए वन विभाग की मंजूरी आवश्यक।

केरल राज्य में पर्यटन और स्थानीय आवागमन के मुख्य धारा गावी मार्ग पर, केएसआरटीसी (केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) ने सुरक्षा चिंता के कारण अपने प्रीयदर्शिनी बस सेवा में यात्रियों की अधिकतम संख्या 55 तक सीमित कर दी है। यह निर्णय कई बार हुई तकनीकी गड़बड़ी और अति-भीड़भाड़ के बाद आया, जिससे यात्रियों को घने जंगल में फँसने की स्थिति उत्पन्न हुई।

पृष्ठभूमि एवं महत्व

गावी मार्ग, पथनाम्थिटा से कुमिली तक विस्तारित, पेरियार टाइगर रिज़र्व के भीतर स्थित है और इस कारण यह एक अत्यधिक संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र है। इस मार्ग पर चलने वाली बसें न केवल पर्यटकों को बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों, केएफडीसी (केरल फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के कर्मचारियों, पुलिस, केएसईबी अधिकारी और स्थानीय निवासियों को भी ले जाती हैं। पिछले वर्षों में इस मार्ग पर उम्रदराज़ और कम रखरखाव वाली बसों को अधिकतम क्षमता से दो गुना तक लादने की प्रथा बनी रही, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ी।

हाल के दो प्रमुख घटनाक्रम

जुलाई 11, 2026 को पथनाम्थिटा डिपो से प्रीयदर्शिनी बस गावी की ओर रवाना हुई, लेकिन लगभग 30 किमी दूर कात्तडिकुन्नु में यांत्रिक खराबी के कारण रुक गई। उस समय 70 से अधिक यात्रियों ने बस में सवार थे, जबकि बस की नियोजित क्षमता केवल 35 सीटें थी। एक अन्य बजट पर्यटन बस में मौजूद मैकेनिक ने मरम्मत कर दी, पर यात्रियों को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

एक दिन पहले, उसी मार्ग पर एक अन्य प्रीयदर्शिनी बस फँस गई, जिसके बाद वन विभाग के वाहन को यात्रियों को बचाने के लिए भेजा गया। इन लगातार घटनाओं ने केएसआरटीसी की पुरानी फ्लीट पर तीखी लहर खड़ी कर दी, जहाँ अधिकांश वाहनों की आयु एक दशक से अधिक है और वे अक्सर अधिकतम क्षमता से दो गुना तक लादे जाते हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

गावी मार्ग पर अतिरिक्त बस सेवाओं की मांग को लेकर जिला प्रशासन ने केएसआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है। हालांकि, वन विभाग की अनुमति के बिना इस मार्ग पर नई बसें जोड़ना संभव नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र संरक्षित वनभूभाग है। केएसआरटीसी ने कहा है कि वह जल्द ही नई, अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बसों को इस मार्ग पर तैनात करने के लिए योजना बना रहा है, पर इसके लिए राज्य सरकार और वन विभाग के साथ समन्वय आवश्यक होगा।

भविष्य की चुनौतियाँ

गावी जैसी दूरस्थ और घनी वनाचल मार्गों पर मोबाइल नेटवर्क की कमी और मौसमी बाढ़ के कारण सड़कों की स्थिति बिगड़ती रहती है। इसलिए, बस टूटने की स्थिति में यात्रियों को तुरंत सहायता मिलना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या को हल करने के लिए बेहतर रूट मैपिंग, नियमित रखरखाव और वैकल्पिक इमरजेंसी प्रोटोकॉल की आवश्यकता होगी।