महाराष्ट्र सरकार ने ऐप‑आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं के लिए एग्रीगेटर नीति लागू की, जिसमें लाइसेंसिंग, किराया नियंत्रण और कारपूलिंग को कानूनी मान्यता दी गई है। यह कदम लाखों यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों की आय सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा पेश करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सभी एग्रीगेटर को राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य
- ड्राइवर को किराए का कम से कम 80% प्राप्त करने की गारंटी
- कारपूलिंग को लागत‑साझाकरण के रूप में वैध मान्यता
महाराष्ट्र सरकार ने लंबे समय से प्रतीक्षित एग्रीगेटर नीति को लागू किया, जिससे ऐप‑आधारित परिवहन सेवाओं को एक सुसंगत नियामक ढाँचा मिलेगा। परिवहन मंत्री प्रताप सारनायक ने बताया कि राज्य भर में लाखों यात्रियों का दैनिक भरोसा इन प्लेटफ़ॉर्म पर है, लेकिन नियामक अंतर के कारण सुरक्षा, किराया और ड्राइवरों की आय से जुड़ी कई समस्याएँ उत्पन्न हुई थीं।
नीति की मुख्य प्रवर्तिताएँ
नीति के तहत सभी एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त करना होगा और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। सरकार एक केंद्रीकृत पोर्टल भी स्थापित करेगी, जो जीपीएस ट्रैकिंग, ड्राइवर सत्यापन और अनुपालन मॉनिटरिंग को एकीकृत करेगा, जिससे उल्लंघनों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
किराया सुरक्षा और ड्राइवर मुनाफ़ा
डायनामिक प्राइसिंग के दुरुपयोग को रोकने हेतु नीति में सरज प्राइसिंग पर सीमाएँ निर्धारित की गई हैं तथा अत्यधिक किराया वृद्धि या अनुचित छूट को रोकने के उपाय शामिल हैं। साथ ही, प्रत्येक किराए का कम से कम 80% ड्राइवर को सुनिश्चित किया गया है, जिससे उनकी आय में स्थिरता आएगी।
फ्लीट सीमाएँ और कारपूलिंग
एकल मालिक द्वारा किसी एक प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत वाहनों की संख्या पर भी सीमा तय की गई है: मुंबई, पुणे, नासिक और नागपुर में अधिकतम 50 वाहन, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में 25 वाहन। यह फ्लीट के अत्यधिक एकत्रीकरण को रोकते हुए छोटे‑छोटे ऑपरेटरों को अवसर प्रदान करेगा। नीति कारपूलिंग को कानूनी मान्यता देती है, जिससे यात्रियों के बीच लागत‑साझाकरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि निजी वाहन मालिकों को लाभ हेतु इस सेवा का दुरुपयोग करने से रोका गया है।
ड्राइवर बैज और शिकायत निवारण
परिवहन विभाग ने पहले जारी किए गए निर्देश को दोहराते हुए, सभी व्यावसायिक यात्रियों को बैज अनिवार्य कर दिया है। बैज प्राप्त करने के लिए निवास प्रमाण पत्र और मराठी भाषा में प्रवीणता जैसे मानदंड तय किए गए हैं। एग्रीगेटर कंपनियों को 24‑घंटे कॉल‑सेंटर चलाना और एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है, जिससे ग्राहक शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित हो सके।
परिवहन यूनियनों ने इस नीति का स्वागत किया, इसे “लंबे समय से प्रतीक्षित नियामक स्पष्टता” बताकर। उन्होंने अतिरिक्त रूप से विभिन्न वाहन वर्गों (हैचबैक, सेडान, एसयूवी) के लिए वर्ग‑विशिष्ट बेस किराया लागू करने की माँग की, ताकि ड्राइवरों की न्यूनतम आय की गारंटी बनी रहे।