डिक्सन टेक्नोलॉजीज और विवो मोबाइल इंडिया ने 51‑49 प्रतिशत शेयर संरचना के साथ भारत में स्मार्टफ़ोन निर्मात्री के रूप में एक नई कंपनी स्थापित की। यह अनुमोदन भारत‑चीन के रणनीतिक निवेश नियमों के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली (10 जुलाई, 2026) – केंद्रीय सरकार ने डिक्सन टेक्नोलॉजीज (इंडिया) लिमिटेड और विवो मोबाइल इंडिया लिमिटेड (VMI) के बीच एक संयुक्त उद्यम (JV) को आधिकारिक रूप से मंज़ूरी दी। यह JV इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, विशेषकर स्मार्टफ़ोन, के निर्माण हेतु एक मूल उपकरण निर्माता (OEM) के रूप में कार्य करेगा, जिसमें डिक्सन 51% और विवो 49% हिस्सेदारी रखेगा।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
डिक्सन टेक्नोलॉजीज, जो पहले इलेक्ट्रॉनिक असेंबली और एटीएम उत्पादन में प्रमुख है, चीन के प्रमुख स्मार्टफ़ोन ब्रांड विवो के साथ साझेदारी कर भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है। विवो ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में मध्यम‑स्तर के स्मार्टफ़ोन से बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है, लेकिन उत्पादन क्षमता सीमित रही है। इस JV के माध्यम से दोनों पक्ष स्थानीय उत्पादन को तेज़ करेंगे, जिससे आयात‑पर निर्भरता घटेगी और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बल मिलेगा।
नियामक ढाँचा: प्रेस नोट 3, 2020
प्रेस नोट 3, 2020, जो अप्रैल 2020 में जारी किया गया था, चीन सहित भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश पर प्रतिबंध लगाता है और ऐसी सभी निवेशों के लिए सरकार की मंज़ूरी अनिवार्य करता है। यह नियम कोविड‑19 महामारी के दौरान संभावित विदेशी अधिग्रहणों को रोकने हेतु आया था, और गैलवान टकराव के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए जारी रहा। इस JV को मिलते ही यह स्पष्ट हो गया कि भारत निवेश नीति में लचीलापन ला रहा है, विशेषकर जब अमेरिकी‑चीन व्यापार तनावों के कारण आर्थिक संतुलन की आवश्यकता बढ़ी है।
वित्त मंत्रालय की नई प्रोत्साहन नीति
समकालीन में, वित्त मंत्रालय ने 2026 में 85 प्रमुख कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट दी, जिसमें लिथियम‑आयन बैटरियों, डिस्प्ले असेंबली और वायरलेस चार्जिंग के लिए आवश्यक इंडक्टर‑कोइल मॉड्यूल शामिल हैं। यह कदम घरेलू निर्माण को तेज़ करने, मूल्य‑वर्धन को बढ़ावा देने और निर्यात क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। डिक्सन‑विवो JV को इन छूटों से सीधे लाभ मिलेगा, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और भारतीय उपभोक्ताओं को किफायती मूल्य में नवीनतम तकनीक उपलब्ध होगी।
भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ
यह JV भारत में चीन‑स्वामित्व वाले तकनीकी कंपनियों के लिए एक नई राह खोलता है। यदि सफल रहा, तो यह अन्य सीमा‑साझा देशों के निवेशकों को भी समान अनुमति मिलने की आशा देगा। हालांकि, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता, गुणवत्ता मानकों की पूर्ति और निरंतर नीति समर्थन जैसी चुनौतियों को पार करना आवश्यक होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि डिक्सन‑विवो अपनी उत्पादन क्षमता को 2029 तक 10 मिलियन यूनिट तक बढ़ा लेता है, तो भारत के स्मार्टफ़ोन निर्यात में भी उल्लेखनीय योगदान हो सकता है।