रियल एस्टेट विशेषज्ञ क्नाइट फ्रैंक इंडिया के अनुसार, 2026 के मध्य तक भारत का आवास बाजार स्थिर रहेगा। शहरीकरण, बुनियादी ढाँचा और कम ब्याज दरें प्रीमियम प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रही हैं, जबकि किफायती घरों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
क्लासिक पोस्ट‑कोविड बूम के बाद, भारत का आवास बाजार अब एक सं consolidation चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ तेज़ी से गिरावट की बजाय धीरे‑धीरे संतुलन बन रहा है। क्नाइट फ्रैंक इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, शहरीकरण, नई बुनियादी ढाँचे की परियोजनाएँ और कम गृह ऋण दरें नई माँग को समर्थन दे रही हैं, जबकि डेवलपर्स की तेज़ लॉन्च गति से इन्वेंट्री में हल्की वृद्धि देखी गई है।
बाजार का वर्तमान स्वरूप
पहले आधे 2026 में, भारत के आठ प्रमुख रेजिडेंशियल बाजारों में 1,71,471 घर बेचे गए, जबकि 1,87,350 नई इकाइयाँ लॉन्च की गईं। यह दर्शाता है कि आपूर्ति धीरे‑धीरे माँग से आगे बढ़ रही है, परन्तु कुल मिलाकर बाजार की बुनियादी मजबूती बरकरार है। शिशिर बैजल, अंतर्राष्ट्रीय पार्टनर, क्नाइट फ्रैंक इंडिया, ने कहा, "हाई‑ग्रोथ वाले इस हाफ‑ईयर ने पिछले दशक के सबसे मजबूत बिक्री प्रदर्शन में से एक दिया है, जबकि मूलभूत तत्व अभी भी मजबूत हैं।"
प्रीमियम सेक्टर का नेतृत्व
2026 के पहले आधे में 1 करोड़ रुपये से ऊपर मूल्य वाले घरों ने कुल बिक्री का 54% हिस्सा लिया, जो पिछले साल के 49% से बढ़ा है। यह संकेत देता है कि उच्च आय वाले खरीदार बेहतर स्थान, निर्माण गुणवत्ता और दीर्घकालिक मूल्य पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, न कि केवल प्रवेश‑स्तर की कीमत पर। प्रीमियम एवं लक्ज़री सेक्टर में मूल्य वृद्धि अब मुख्य रूप से केंद्रित है, जबकि किफायती वर्ग में दबाव बना हुआ है।
किफायती आवास के सामने चुनौतियाँ
सस्ती आवास की मांग अभी भी मौजूद है, परन्तु भूमि की कीमत, नियामक बाधाएँ और सीमित वित्तीय प्रावधान इसे कठिन बना रहे हैं। रेरा (RERA) के कड़े नियम और डेवलपर्स की बढ़ती वित्तीय अनुशासन इन जोखिमों को कम कर रहे हैं, परन्तु इन्वेंट्री में वृद्धि के कारण भविष्य में कीमतों में असमानता उत्पन्न हो सकती है।
भविष्य की दिशा
रिपोर्ट का अनुमान है कि कम ब्याज दरों और निरंतर बुनियादी ढाँचा निवेश के साथ, आवास बाजार 2026 के दूसरे आधे में भी स्थिर रहेगा। यदि डेवलपर्स लचीलापन वाले भुगतान योजनाओं, सब्सिडी स्कीम और स्टांप ड्यूटी माफी जैसे प्रोत्साहनों को अपनाते हैं, तो माँग को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। अंततः, शहरी प्रवास, रोजगार की स्थिरता और सरकारी पहलों के सहयोग से भारतीय आवास बाजार की लचीलापन बनी रहेगी।