उच्च न्यायालय ने यूएस आधारित कॉरोहेल्थ इन्फोटेक को 800 कर्मचारियों की नौकरी कटौती के बाद समन्वय के लिए प्रेरित किया, ताकि उद्योग संबंधी कोड के तहत विवाद सुलझाया जा सके।
कोराला के उच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय में यूएस आधारित कॉरोहेल्थ इन्फोटेक प्रा. लिमिटेड, उसके कर्मचारियों और राज्य सरकार को औद्योगिक संबंध कोड 2020 के तहत समन्वय (conciliation) प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया। यह कदम कंपनी द्वारा कोचि और कोज़िकोड में अपनी गतिविधियों को बंद करने के फैसले के बाद आया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 800 कर्मचारियों को निकाल दिया गया।
कानूनी पृष्ठभूमि
उद्योग संबंध कोड 2020 ने नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच विवादों को हल करने के लिये समन्वय को प्राथमिक विकल्प के रूप में स्थापित किया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का सामाजिक दायित्व है कि वह इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाए, खासकर जब बड़ी संख्या में नौकरीयों पर प्रभाव पड़े।
कॉरोहेल्थ का दावाः
कंपनी ने कहा कि संचालन बंद करने का निर्णय “कंट्रोल के बाहर” कारणों से लिया गया था और उसने पहले ही कर्मचारियों को सेवरेंस भुगतान कर दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिला श्रम अधिकारी द्वारा जारी “स्टेटस को रखिए” आदेश को केवल समन्वय के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि एक अनिवार्य आदेश के रूप में।
समन्वय की दिशा में कदम
न्यायालय ने 10 जुलाई को एक समन्वय बैठक के लिए एक तिथि तय की और सभी पक्षों को उपस्थित होने का निर्देश दिया। यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के लिए एक संभावित पुनर्वास मार्ग खोलता है, बल्कि कॉरोहेल्थ जैसी विदेशी कंपनियों के लिए भी एक मिसाल कायम करता है कि वे भारतीय श्रम कानूनों का पालन करते हुए विवादों का समाधान कर सकते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक असर
केंद्र सरकार के श्रम कोड पर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ, जैसे कि कोराला के बाएँ नेता वी. शिवंकुट्टी ने ‘हायर एंड फायर’ नीतियों की निंदा की, इस मामले को और भी जटिल बना देती हैं। न्यायालय का यह आदेश राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर श्रम नीतियों के संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है।