कोयंबटूर में आयोजित एक जागरूकता सत्र में वित्तीय संस्थानों को नई श्रम संहिता के महत्व से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने कहा कि नियमों का कड़ाई से पालन ही भारत की औद्योगिक वृद्धि को स्थायी बना सकता है।
कोयंबटूर में 9 जुलाई को आयोजित एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम में केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, केनरा बैंक तथा कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रतिनिधियों को नई श्रम संहिता के प्रमुख बिंदुओं से परिचित कराया गया। इस सत्र का उद्घाटन जिला राजस्व अधिकारी एस. मधुरानाथगी ने किया और उन्होंने औद्योगिक विकास में श्रम कानूनों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर बल दिया।
नई श्रम संहिता – चार कोड का सारांश
2019‑2020 में पारित चार मुख्य श्रम कोड – वेतन कोड (2019), सामाजिक सुरक्षा कोड (2020), औद्योगिक संबंध कोड (2020) और सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियों कोड (2020) – सभी नियोक्ताओं पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे वे निजी हों या सार्वजनिक, राज्य‑स्तर के हों। इस बदलाव का उद्देश्य नियमों को सरल बनाकर निवेशकों के लिए स्पष्टता प्रदान करना और कार्यस्थल पर न्यायसंगत वातावरण सुनिश्चित करना है।
वित्तीय संस्थानों की भूमिका
केनरा बैंक के उप‑प्रबंधक शिलजा के.आर. ने कहा कि बैंक को अब ऋण प्रदान करने से पहले कंपनियों की श्रम अनुपालन स्थिति का मूल्यांकन करना अनिवार्य हो गया है। यह नई नीति न केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि वित्तीय जोखिम को भी कम करती है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।
तकनीकी सत्र और प्रमुख बिंदु
उप मुख्य श्रम आयुक्त श्रीनु दारा और श्रम प्रवर्तन अधिकारी रमेश कुमार टी.जे. ने प्रतिभागियों को चार कोडों की प्रमुख प्रावधानों, दंडात्मक प्रावधानों और नियोक्ता‑कर्मचारी संबंधों में अपेक्षित बदलावों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वेतन कोड में न्यूनतम वेतन, समान कार्य के लिए समान वेतन और समय‑समय पर वेतन भुगतान के नियम स्पष्ट किए गए हैं, जबकि सामाजिक सुरक्षा कोड में पेंशन, बीमा और कर्मचारी कल्याण योजनाओं को एकीकृत किया गया है।
भविष्य की दिशा और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां इन कोडों का पूर्ण अनुपालन करती हैं तो भारत का औद्योगिक माहौल अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश‑स्नेही बन जाएगा। हालांकि, छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए अनुपालन लागत और कार्यान्वयन की जटिलता अभी भी बड़ी चुनौती है। सरकार को जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल टूल्स प्रदान करने और अनुपालन के लिए सहज प्रक्रिया स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि सभी वर्गों के उद्यम बिना बाधा के इस परिवर्तन को अपनाएँ।