आंध्र प्रदेश सरकार ने 1,010 करोड़ रुपये की पूल्ड नगर बांड योजना को सिद्धांततः मंजूरी दी है। इस पहल से शहरी स्थानीय निकायों को जल, सड़क, सीवेज और अन्य आवश्यक परियोजनाओं के लिए पूंजी बाजार से फंड जुटाने का अवसर मिलेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ₹1,010 करोड़ की पूल्ड बॉन्ड योजना को राज्य ने मंजूरी दी
  • ULBs अब प्रमुख जल, सड़क, सीवेज आदि परियोजनाओं के लिए फंड जुटा सकेंगी
  • उच्च-स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी चयन प्रक्रिया और कार्यान्वयन की देखरेख करेगी

आंध्र प्रदेश ने अपनी शहरी वित्तीय रणनीति में एक बड़ा कदम उठाते हुए ₹1,010 करोड़ की पूल्ड नगर बांड जारी करने की रूपरेखा को सिद्धांततः स्वीकृति दी है। यह पहल शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को दीर्घकालिक संस्थागत फाइनेंस तक पहुंच प्रदान करेगी, जिससे वे जल आपूर्ति, सीवेज नेटवर्क, सड़कों, बाढ़ निकास, कचरा प्रबंधन और स्ट्रीट लाइटिंग जैसी प्राथमिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को तेज़ी से लागू कर सकें।

पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय महत्व

भारत में नगर बांड का प्रयोग अभी शुरुआती चरण में है, और अधिकांश राज्य अपने शहरी वित्त को केंद्रीय अनुदानों पर निर्भर देखते हैं। आंध्र प्रदेश की यह योजना, जो सुवर्णा आंध्र‑2047 विज़न के अनुरूप है, शहरी विकास को स्वावलंबी बनाने और वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक संरचनात्मक सुधार के रूप में देखी जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर, ऐसी बांड्स ने मुंबई, चेन्नई और पुणे जैसे बड़े शहरों में निवेश को आकर्षित किया है, लेकिन छोटे‑दरजे के नगरों में अभी तक सीमित प्रगति हुई है।

कार्यशील ढांचा और निगरानी तंत्र

राज्य सरकार ने एक उच्च-स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है, जिसका नेतृत्व प्रिंसिपल सचिव, नगरपालिका प्रशासन और शहरी विकास करेंगे। यह कमेटी बोली मूल्यांकन, मर्चेंट बैंकर की चयन प्रक्रिया और बांड कार्यक्रम की कार्यान्वयन निगरानी को संभालेगी। तकनीकी और सचिवीय सहायता के लिए आंध्र प्रदेश शहरी बुनियादी ढाँचा एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (APUIAML) को नियुक्त किया गया है।

हरित बांड की संभावनाएँ

पूल्ड बांड फ्रेमवर्क के साथ, ग्रीन बांड की अवधारणा भी आगे बढ़ रही है। ग्रेटर विज़ाखापत्तनम नगरपालिका (GVMC) को पर्यावरण‑सतत परियोजनाओं जैसे जल पुन: उपयोग, जलवायु‑प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचा और ऊर्जा‑कुशल जल प्रबंधन के लिए ग्रीन बांड जारी करने की संभावना पर काम करने का निर्देश दिया गया है। यह पहल न केवल वित्तीय विविधीकरण को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि राज्य के जलवायु लक्ष्य को भी साकार करेगी।

भविष्य की संभावनाएँ

पूल्ड बांड के माध्यम से दीर्घकालिक फंडिंग सुनिश्चित करके, आंध्र प्रदेश शहरी क्षेत्रों में निवेशकों के भरोसे को बढ़ाने, क्रेडिट रेटिंग सुधारने और राजस्व प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में अग्रसर है। यदि सफल रहा, तो यह मॉडल अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मानक स्थापित कर सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बुनियादी ढाँचे की वित्तीय स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।