मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने डंकुनी में 600 करोड़ रुपये के निवेश से लक्स कोज़ि गारमेंट हब की नींव रखी, जिससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार और उद्योग‑मित्र माहौल का वादा किया गया। इस पहल को राज्य में विदेशी निवेश को आकर्षित करने और युवा प्रतिभा को बनाए रखने की रणनीति के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ₹600 करोड़ निवेश के साथ लक्स कोज़ि गारमेंट हब का निर्माण शुरू
  • डंकुनी में 3,000 प्रत्यक्ष और 6,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन
  • पश्चिम बंगाल में उद्योग‑मित्र माहौल बनाने की सरकारी प्रतिबद्धता

वेस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 11 जुलाई को डंकुनी, हुगली में लक्स कोज़ि गारमेंट हब के लिए आधारशिला रखी। इस परियोजना का कुल अनुमानित खर्च ₹600 करोड़ है और यह पूरे एशिया में सबसे बड़े वस्त्र उत्पादन केंद्रों में से एक बनने की संभावना रखती है।

परियोजना का महत्व

लक्स कोज़ि समूह के अध्यक्ष अशोक टोडी ने बताया कि इस विस्तार से मौजूदा क्षमता 12 करोड़ टुकड़ों से बढ़कर अतिरिक्त 20 करोड़ टुकड़े होगी, जिससे कंपनी की राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता लगभग 36 करोड़ टुकड़े प्रति वर्ष पहुंच जाएगी। इस नई सुविधा से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि तकनीकी दक्षता, कचरे में कमी और क्षेत्रीय प्रोसेसिंग बाधाओं का समाधान भी होगा।

रोजगार और आर्थिक प्रभाव

पर्यवेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इस हब से सीधे 3,000 नौकरियां और अप्रत्यक्ष रूप से 6,000 तक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश राज्य की औद्योगिक विविधता को बढ़ाएगा और युवा श्रमिकों को बाहर जाने के बजाय अपने घर के पास ही रोजगार प्रदान करेगा।

राजनीतिक एवं प्रशासनिक संदर्भ

समारोह में मंत्री टापस रॉय, अर्जुन सिंह, डॉ. शरदवात मुखर्जी तथा भाजपा राज्य अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य जैसे प्रमुख पार्टी नेता भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, “हम दोहरी इंजन सरकार के लाभ को महसूस करेंगे और हमें बंगाल में जबरन वसूली व सिंडिकेट रैकेट को समाप्त करना होगा।” यह बयान पिछले दो महीनों में इस संस्कृति को कम करने की प्रशासनिक कोशिशों को उजागर करता है।

भविष्य की दिशा

भर्ती के बाद, अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल जल्द ही विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और उद्योग‑मित्र नीति के तहत राज्य को एक प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल हब में बदल देगा। इस पहल को राज्य के आर्थिक पुनरुत्थान की मुख्य धारा माना जा रहा है, जो दीर्घकालिक विकास और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देगा।