ODOP पहल ने यूपी के पारंपरिक शिल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया, 3 लाख से अधिक नौकरियां सृजित कीं और निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ODOP योजना ने 3.16 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए
- उत्पादों की निर्यात मूल्य 86,000 करोड़ से बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हुआ
- 79 वस्तुओं को जीआई टैग मिला, वैश्विक बाजार में पहचान मजबूत हुई
उत्तरी प्रदेश सरकार ने 2018 में शुरू की गई One District One Product (ODOP) योजना के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्ट वस्तु को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रखा। इस पहल ने कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, मुफ्त टूलकिट, वित्तीय सहायता, ब्रांडिंग और बाजार पहुंच प्रदान की, जिससे छोटे‑स्तर के उत्पादकों को बड़े मंचों पर प्रदर्शित किया जा सका।
योजना की पृष्ठभूमि और BIMARU शब्द का पुनरावलोकन
बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को 1980 के दशक में जनसांख्यिकीविद् आशिष बोस ने "BIMARU" कहा था, जिसका अर्थ था आर्थिक, स्वास्थ्य और शिक्षा के संकेतकों में पिछड़े रहना। योगी सरकार ने इस लेबल को तोड़ने के लिए औद्योगिक पुनरुत्थान को प्राथमिकता दी, और ODOP को एक रणनीतिक उपकरण बनाया। आज प्रदेश को "BIMARU" से हटकर भारत के प्रमुख निर्यात‑हब में बदला जा रहा है।
सफलता के आँकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में 1.46 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण मिला, 20,000 से अधिक उद्यमियों को सीधे लाभ हुआ, और कुल 3.16 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला। निर्यात में 2017‑18 के 86,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026‑27 में 1.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जिसमें लगभग 50 % ODOP एवं हस्तशिल्प उत्पादों का योगदान है।
जिला‑विशिष्ट उत्पादों की वैश्विक यात्रा
अग्रा के लेदर‑मरबल, अलीगढ़ के ताले, आज़मगढ़ की काली मिट्टी, अयोध्या की गुड़, कानauj की इत्र, वाराणसी के रेशमी साड़ी, मोरादाबाद की धातु शिल्प, और सहारनपुर के फर्नीचर जैसे उत्पाद अब पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ई‑कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म की मदद से विदेशों में भी ग्राहकों तक पहुँच रहे हैं। 79 उत्पादों को जीआई टैग मिला है, जिससे उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ हुई।
व्यक्तिगत कहानियाँ
मोरादाबाद के पैड्मा श्री धिलशाद हुसैन ने बताया कि ODOP ने शहर की पीतल उद्योग को नई बाजार पहुंच दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग में तेज़ी आई। अमरौहा के फ़र्नीचर कारीगर जितेंद्र सैनी ने कहा कि धातु‑काठ के शिल्प को ODOP में शामिल करने से उनके आय में दोगुनी बढ़ोतरी हुई। निर्यातकर्ता फ़िरोज़ अहमद ने कहा कि बेहतर गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग ने यूपी के कारीगरों को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित किया है।
समग्र रूप से, ODOP योजना ने न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक बदलाव भी लाया है, जिससे ग्रामीण भारत के कारीगरों को आत्मविश्वास और नई संभावनाएँ मिली हैं।