कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धु अक्टूबर में भारत के लिए एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। CEPA के तहत कनाडा को भारत में प्रीफ़रेंशियल बाजार पहुंच मिलने की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कनाडा-भारत CEPA के तीसरे दौर की बातचीत समाप्त हुई।
- मनिंदर सिद्धु अक्टूबर में भारतीय व्यापारियों के साथ नई डीलों की तलाश करेंगे।
- ऊर्जा, क्रिटिकल मिनराल्स, एग्री‑फ़ूड, डिजिटल और क्लीन टेक्नोलॉजी प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावना।
कनाडा और भारत के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) इस वर्ष के अंत तक अंतिम रूप देने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस सप्ताह 6‑10 जुलाई को ओटावा में हुई तीसरी वार्ता में दोनों पक्षों ने व्यापार बाधाओं को कम करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर सहमति जताई।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
पिछले 15 वर्षों में दोनों देशों ने आर्थिक पूरकता को एक औपचारिक समझौते में बदलने का प्रयास किया है, लेकिन 2023 में जे.ट्रूडो द्वारा भारतीय एजेंटों को हड़ताल में शामिल करने के आरोपों ने संबंधों को नाज़ुक बना दिया था। इस तनाव के बाद, 2025 में जी‑7 शिखर सम्मेलन में मोदी और कार्नी की मुलाकात ने फिर से विश्वास की बुनियाद रखी, जिससे CEPA वार्ताओं को गति मिली।
CEPA के प्रमुख प्रावधान
सीपीए का मुख्य उद्देश्य कनाडा के सामान और सेवाओं को भारत के पाँचवें सबसे बड़े बाजार में प्रीफ़रेंशियल प्रवेश प्रदान करना है। यह समझौता न केवल टैरिफ़ को घटाएगा, बल्कि निवेशकों के लिए नियमों को स्पष्ट करेगा, जिससे दोनों देशों में व्यापारिक जोखिम कम होगा। ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, एग्री‑फ़ूड, डिजिटल और साफ़ प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए विशेष मंच स्थापित किया गया है।
अक्टूबर में व्यापार प्रतिनिधिमंडल का महत्व
मनिंदर सिद्धु, जो पंजाब में जन्मे और ब्रैम्पटन ईस्ट से प्रतिनिधित्व करते हैं, अक्टूबर में भारत की यात्रा पर एक बड़े व्यापार प्रतिनिधिमंडल को ले जाएंगे। यह दौरा नई निवेश अवसरों, आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन, और सतत विकास के लिए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस साल कनाडा आने का निमंत्रण मिला है, जिससे द्विपक्षीय संवाद का स्तर और भी ऊँचा होगा।
आगे की संभावनाएँ
यदि CEPA सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो यह न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ती निर्यात‑आयात को सुदृढ़ करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत के बाजार में कनाडाई तकनीक और पूंजी का प्रवाह तेज़ होगा, जिससे नौकरियों का सृजन और नवाचार को गति मिलेगी।