सिंगारेनी कोलीरिज़ कंपनी लिमिटेड (SCCL) ने देश के प्रमुख कोयला गैसीकरण परियोजनाओं का अध्ययन करने के लिए एक टीम भेजी है। यह कदम कंपनी की ऊर्जा पोर्टफोलियो को विविधीकृत करने और नई तकनीकों की व्यवहार्यता को परखने की दिशा में उठाया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • SCCL अधिकारियों की टीम प्रमुख गैसीकरण प्लांट्स का दौरा करेगी
  • भुई-स्तर और सतही गैसीकरण के तकनीकी‑आर्थिक अध्ययन चल रहे हैं
  • अमोनियम नाइट्रेट प्लांट की लाभप्रदता को सुधारने के विकल्प खोजे जा रहे हैं

सिंगारेनी कोलीरिज़ कंपनी लिमिटेड (SCCL), जो तेलंगाना के प्रमुख कोयला खनन संस्थानों में से एक है, ने अपने दीर्घकालिक रणनीतिक योजना के तहत कोयला गैसीकरण क्षेत्र में अवसरों की खोज शुरू कर दी है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य कंपनी को पारंपरिक कोयला खनन से हटाकर एक बहु‑ऊर्जा उद्यम में परिवर्तित करना है।

मुख्य गैसीकरण परियोजनाओं का दौरा

इस महीने के अंत में SCCL की एक प्रतिनिधि टीम तेलगु में स्थित तलचर, एमसीएल‑बीएचईएल और जेएसपीएल के प्रमुख गैसीकरण प्लांट्स का निरीक्षण करेगी। इन साइटों पर चल रही संचालन प्रक्रियाओं, उत्पादन दक्षता और पर्यावरणीय अनुपालन को समझना कंपनी के भविष्य के निवेश निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

तकनीकी‑आर्थिक अध्ययन और संभावनाएँ

SCCL के कमांडेंट‑इन‑चिफ, बुद्धिप्रकाश ज्योती ने बताया कि बीमरम्, चेनुर सॉउथ और नाइनी क्षेत्रों में सतही कोयला गैसीकरण परियोजनाओं की व्यवहार्यता का मूल्यांकन किया जा रहा है। साथ ही, बेल्लाम्पल्ली और रामगुंडम क्षेत्रों में पाँच गहरे कोयला ब्लॉकों को अंडरग्राउंड कोयला गैसीकरण (UCG) के संभावित स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है, जहाँ ड्रिलिंग कार्य चल रहा है।

अमोनियम नाइट्रेट प्लांट का पुनर्मूल्यांकन

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) ने सिंगारेनी थर्मल पावर प्लांट (STPP) परिसर में 400 टन‑प्रति‑दिन अमोनियम नाइट्रेट मेल्ट प्लांट की व्यवहार्यता का अध्ययन पूरा किया। हालांकि, प्रारंभिक आँकड़ों ने निवेश पर प्रतिफल को अपर्याप्त दर्शाया, जिससे व्यापारिक आकर्षण कम हो गया। इसे सुधारने के लिए SCCL ने क्षमता बढ़ाने, केंद्र सरकार से वैलियाबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) प्राप्त करने और स्वदेशी तकनीकों को अपनाने जैसे विकल्पों पर विचार किया है।

ऊर्जा नीति और भविष्य की दिशा

भारत की ऊर्जा नीति में कोयला गैसीकरण को एक स्वच्छ और कम‑कार्बन विकल्प के रूप में प्रमुखता मिल रही है। SCCL का यह पहल न केवल कंपनी के लिए बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि इन परियोजनाओं में सफलतापूर्वक तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों को पार किया गया, तो यह भारतीय कोयला उद्योग के पुनरुत्थान का संकेतक बन सकता है।