हॉरमुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी-ईरानी तनाव के बढ़ने से एशिया‑पैसिफिक शेयर बाजार में दो प्रतिशत से अधिक गिरावट आई, जबकि तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इरानी जहाजों पर नाकाबंदी दोहराई और 20% ट्रांज़िट शुल्क की घोषणा की, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- US ने इरान के शिपिंग पर नाकाबंदी दोहराई, 20% ट्रांज़िट शुल्क की घोषणा की।
- एशिया‑पैसिफिक MSCI इंडेक्स 1.7% गिरा, ताइवान और कोरिया में शेयर 3‑5% तक गिरे।
- ब्रेंट और WTI दोनों में लगभग 2% की उछाल, चार‑सप्ताह के उच्चतम स्तर पर।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि वॉशिंगटन अब इरान के शिपिंग पर नाकाबंदी फिर से लागू करेगा और स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ से गुजरने वाले माल पर 20% शुल्क लेगा। यह कदम क्षेत्र में मौजूदा सैन्य तनाव को और तेज़ कर रहा है, जिससे एशिया‑पैसिफिक शेयर बाजारों में तेज़ी से गिरावट आई।
बाजार की प्रतिक्रिया
MSCI के व्यापक एशिया‑पैसिफिक इंडेक्स, जिसमें जापान को छोड़कर सभी देशों के शेयर शामिल हैं, ने 1.7% की गिरावट दर्ज की। सबसे अधिक गिरावट ताइवान (3% से अधिक) और दक्षिण कोरिया (5% से अधिक) में देखी गई, जबकि जापान का निक्केई 225 0.8% नीचे रहा। अमेरिकी S&P 500 ई‑मिनी फ्यूचर्स भी 0.3% घटे। चीन के CSI 300 ने 0.4% की मामूली गिरावट दर्ज की, क्योंकि जून के निर्यात‑आयात डेटा ने अर्थशास्त्रियों की अपेक्षाओं को पार किया और बड़े नुकसान को सीमित किया।
तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर $84.98 प्रति बैरल (2% ऊपर) और यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $79.79 प्रति बैरल (2.1% ऊपर) पर बंद हुए। ब्रेंट ने पिछले दिन 9.6% की छलांग लगाते हुए मई 2020 के बाद सबसे बड़ा एक‑दिन का लाभ दर्ज किया। इस उछाल का मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ में दो यूएई टैंकरों पर इरानी क्रूज़ मिसाइलों द्वारा हमला था, जिसमें एक भारतीय चालक मारा गया और आठ अन्य घायल हुए।
राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
ईरान के विदेश मंत्री सेयेद अब्बास अराघी ने ट्रम्प के 20% शुल्क प्रस्ताव का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि इरान हमेशा इस जलडमरूमध्य का “रक्षक” रहा है और “20% बहुत अधिक है, हम निष्पक्ष रहेंगे।” ट्रम्प ने खुद को “हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का रक्षक” घोषित किया, सुरक्षा लागत वसूलने के लिए शुल्क का औचित्य दिया। इरान ने इस प्रस्ताव को कड़ा विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि केवल वह ही इस मार्ग पर अधिकार रखता है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि तनाव बढ़ता रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान, शिपिंग लागत में वृद्धि और एशिया‑पैसिफिक में निवेशकों की जोखिम भावना में कमी देखी जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भू‑राजनीतिक टकराव न केवल ऊर्जा बाजार को बल्कि एशिया के निर्यात‑आधारित अर्थव्यवस्थाओं को भी गहरा प्रभाव डालेंगे। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और संभावित नाकाबंदी या अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव को अपने पोर्टफोलियो में सम्मिलित करना चाहिए।