केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (KIA) ने घरेलू यातायात के आधार पर पहले ही देश का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनकर दिखाया है, और अगले दो वर्षों में समग्र ट्रैफ़िक में भी दूसरा स्थान हासिल करने का लक्ष्य रखता है। बेंगलुरु में चल रहे 30‑से‑अधिक बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स इस वृद्धि को साकार करेंगे।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • KIA घरेलू यातायात के आधार पर पहले से ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा है।
  • आगामी चार‑वर्षीय अवधि में 72 मिलियन यात्रियों और 7,50,000 टन कार्गो की उम्मीद है।
  • टर्मिनल‑2, WCFT और मल्टी‑लेवल कार पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स 2027 तक पूर्ण होंगे, जिससे टैरिफ में गिरावट आएगी।

केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (KIA), जिसे बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा है। हालांकि, बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (BIAL) के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हरी मारर ने हाल ही में एयरोनॉटिकल टैरिफ नियोजन के लिए आयोजित AERA स्टेकहोल्डर मीटिंग में यह स्पष्ट किया कि KIA अगले दो वर्षों में समग्र ट्रैफ़िक के आधार पर दूसरा स्थान प्राप्त करेगा।

वर्तमान स्थिति और आँकड़े

स्टेकहोल्डर मीटिंग के मिनट्स के अनुसार, KIA ने घरेलू ट्रैफ़िक में पहले ही दूसरे क्रमांक पर पहुंच कर अपनी स्थिति पक्की कर ली है। नई दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे बड़ा है, उसके बाद मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा आता है। KIA वर्तमान में 32 अंतरराष्ट्रीय और 80 घरेलू गंतव्यों को 39 एयरलाइन पार्टनर, जिसमें 16 फ़्रीटर शामिल हैं, के साथ जोड़ता है।

भविष्य की प्रक्षेपण और आर्थिक प्रभाव

मारर ने बताया कि चौथे नियंत्रण अवधि (1 अप्रैल 2026‑31 मार्च 2031) में KIA का यात्री ट्रैफ़िक लगभग 72 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है, जबकि कार्गो मात्रा 7,50,000 टन तक बढ़ने की उम्मीद है। यह वृद्धि न केवल बेंगलुरु की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भारत की समग्र एयरोस्पेस अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

चल रहे प्रमुख प्रोजेक्ट्स

बेंगलुरु हवाई अड्डे की विकास योजना में 30 से अधिक प्रमुख परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनमें टर्मिनल‑2 फेज‑2, वेस्टर्न क्रॉस‑फ़ील्ड टैक्सीवे (WCFT), एप्रन स्टैंड, मल्टी‑लेवल कार पार्क और ईस्टर्न कनेक्टिविटी टनल शामिल हैं। WCFT परियोजना लगभग 50 % पूरी हो चुकी है और इसे 31 मार्च 2027 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। सभी एयरफ़ील्ड कार्य 31 दिसंबर 2027 तक समाप्त हो जाएंगे, जबकि टर्मिनल‑1 अपग्रेड का क्रमिक कार्य 2027 में समाप्त होगा।

टैरिफ नीति में परिवर्तन

प्रस्तावित वार्षिक टैरिफ योजना में लैंडिंग और पार्किंग शुल्क को पहली वित्तीय वर्ष में 35‑40 % तक घटाने का प्रस्ताव है, जिसके बाद चरणबद्ध वृद्धि होगी। उपयोगकर्ता विकास शुल्क (UDF) भी वर्तमान स्तरों से घटाया जाएगा, जिसमें आगे के समायोजन WCFT जैसी प्रमुख सुविधाओं के कमिशनिंग पर आधारित होंगे। इस रणनीति से यात्रियों को सस्ते किराए पर बेहतर सेवाएँ मिलेंगी, जिससे हवाई यात्रा की माँग में अतिरिक्त वृद्धि होगी।

भविष्य की दिशा

KIA का विकास मॉडल भारत के कई अन्य हवाई अड्डों के लिए एक मानक स्थापित कर सकता है। यदि प्रस्तावित कैपेक्स और टैरिफ नीति सफल रहती है, तो बेंगलुरु न केवल दक्षिणी भारत का हब बनेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आर्थिक और लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करेगा।