तमिलनाडु पुलिस के साइबर अपराध विंग ने एक विशेष अभियान चलाकर मात्र दो दिनों में 837 साइबर अपराधियों को दबोच लिया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से 'म्यूल बैंक खातों' के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए की गई है।

मुख्य बातें

  • तमिलनाडु पुलिस ने 48 घंटे के विशेष अभियान में 837 गिरफ्तारियां कीं।
  • यह कार्रवाई 'म्यूल बैंक खातों' के नेटवर्क को तोड़ने के लिए की गई थी।
  • कुल 545 करोड़ रुपये से अधिक के धोखाधड़ी वाले मामलों की जांच की गई।
  • 204 मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

तमिलनाडु पुलिस के साइबर अपराध विंग (CCW) ने राज्य भर में एक अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए साइबर अपराध के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। पुलिस द्वारा चलाए गए 48 घंटे के 'राज्यव्यापी विशेष अभियान' के दौरान कुल 837 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। यह अभियान विशेष रूप से उन व्यक्तियों को लक्षित करने के लिए बनाया गया था जो साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त अवैध धन को स्थानांतरित करने के लिए 'म्यूल बैंक खातों' (Mule Accounts) का उपयोग कर रहे थे।

ऑपरेशन का विवरण और तकनीक

पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल के निर्देशानुसार, इस ऑपरेशन को अत्यधिक तकनीकी सटीकता के साथ अंजाम दिया गया। अपराधियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के 'प्रतिबिंब पोर्टल' का उपयोग किया गया। वित्तीय डेटा विश्लेषण के माध्यम से पुलिस ने उन बैंक खातों के बीच संबंध स्थापित किए जो अपराध की कमाई को छिपाने के लिए उपयोग किए जा रहे थे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि साइबर अपराधी अब सीधे तौर पर पैसा नहीं चुराते, बल्कि वे आम लोगों के बैंक खातों को किराए पर लेकर या धोखे से उन्हें 'म्यूल अकाउंट' में बदल देते हैं। इससे पुलिस के लिए असली अपराधी तक पहुँचना कठिन हो जाता है। तमिलनाडु पुलिस की यह कार्रवाई इस जटिल वित्तीय श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

"म्यूल खाते वे बैंक खाते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने, स्थानांतरित करने या निकालने के लिए करते हैं।" - डॉ. अग्रवाल

इस अभियान के दौरान पुलिस ने 9,804 शिकायतों और 545 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की जांच की। जांच के दौरान 601 मामलों में गिरफ्तारी की गई और 157 नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गईं। पुलिस ने मौके से 204 मोबाइल फोन, अन्य स्टोरेज डिवाइस, नकद राशि और महत्वपूर्ण बैंक दस्तावेज भी बरामद किए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में भारत में 'म्यूल अकाउंट' धोखाधड़ी के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। अपराधी अक्सर कम आय वाले लोगों को उनके बैंक खाते साझा करने के बदले थोड़े पैसे का लालच देते हैं, जिससे वे अनजाने में बड़े साइबर अपराध का हिस्सा बन जाते हैं।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि 'म्यूल अकाउंट' का उपयोग करना भी एक गंभीर कानूनी अपराध है, भले ही आपने जानबूझकर धोखाधड़ी न की हो?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 'म्यूल अकाउंट' क्या होता है?
यह एक ऐसा बैंक खाता है जिसका उपयोग अपराधी धोखाधड़ी के पैसे को इधर-उधर भेजने या निकालने के लिए करते हैं।

2. इस कार्रवाई में पुलिस ने क्या बरामद किया?
पुलिस ने 204 मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, नकद और बैंक दस्तावेज जब्त किए हैं।