कर्नाटक सरकार ने 2026 के मायसूर दशहरा को 11‑दिनों के भव्य उत्सव के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है, जबकि जल संकट की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने बताया कि नई सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ एक हवाई शो भी आयोजित किया जाएगा, जिसके लिये केंद्र से अनुमति ली जाएगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मायसूर दशहरा 2026 को 11 दिनों तक बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा।
- सरकार ने जल संकट के बावजूद उत्सव को घटाने से इंकार किया।
- विमान शो सहित नई सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए केंद्र से अनुमति मांगी जाएगी।
बेंगलुरु के विधि सभा में शुक्रवार को आयोजित एक उच्च‑स्तरीय तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक इस साल अपने प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर—मायसूर दशहरा—को कम नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि यह उत्सव 11 दिनों तक चलने वाला है, जिसमें अगस्त 26 को गजपूजा, 11 अक्टूबर को दशहरा उद्घाटन, और 21 अक्टूबर को जुम्बू सवारी व नंदी पूजा जैसे प्रमुख अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
उत्सव की रूपरेखा और नई पहल
सरकार ने एक कार्यकारी समिति का गठन करने का निर्देश दिया है, जो सभी लॉजिस्टिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहलुओं की देखरेख करेगी। इस समिति को अंतिम रूप से मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित किया जाएगा, साथ ही महाप्रभु या अन्य प्रमुख व्यक्तियों को समारोह का उद्घाटन करने की सिफारिश भी की जाएगी। शिवाकुमार ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार से अनुमति लेकर इस वर्ष एक हवाई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना है, जिससे दशहरा की अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण क्षमता बढ़ेगी।
पर्यावरणीय चिंताएं और जलस्थिति
हालिया सूखे की खबरों के बावजूद, मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सप्ताह में हुई वर्षा से कई क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति में सुधार आया है और इस वर्ष पानी की कमी का जोखिम नहीं है। उन्होंने किसानों की मांगों को मौजूदा कानूनी ढाँचे में ही सुलझाने का आश्वासन दिया, जिससे सामाजिक असंतोष को कम किया जा सके।
संस्कृति, पर्यटन और आर्थिक प्रभाव
मायसूर दशहरा कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, और यह पिछले वर्षों में पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि का कारण बना है। राज्य सरकार ने शाक्ति फ्री बस यात्रा योजना जैसी पहलें लागू की हैं, जिससे महिला यात्रियों का प्रवाह बढ़ा और विदेशी एवं घरेलू पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ। इस वर्ष प्रमुख कलाकारों के प्रदर्शन, पारंपरिक नृत्य, और खेल कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
राजनीतिक एवं सामाजिक संदर्भ
शिवाकुमार ने दशहरा समिति के गठन को राजनीतिकरण से बचाने का आवाहन किया, यह कहा कि सभी निर्णयों में चुने हुए प्रतिनिधियों और हितधारकों की राय शामिल होगी। उन्होंने कर्नाटक की विविध परम्पराओं को उजागर करने हेतु सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रमों की विस्तृत सूची तैयार करने का वादा किया, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन मिले।