भारत की लंबी देर से चल रही प्रोजेक्ट‑75(I) अब जर्मनी के साथ लगभग 70,000 करोड़ रुपये की डील के करीब है। नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बी फ्लीट में कमी को दूर करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • प्रोजेक्ट‑75(I) में छह उन्नत पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है
  • डील का अनुमानित मूल्य लगभग 70,000 करोड़ रुपये है
  • जर्मनी के साथ बातचीत जल्द ही निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकती है

भारत की नौसैनिक शक्ति को सुदृढ़ करने के लिए प्रोजेक्ट‑75(I) को कई सालों से प्राथमिकता दी जा रही है। इस परियोजना में छह आधुनिक परम्परागत पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है, जो जर्मन कंपनियों के साथ सहयोग में किया जाएगा।

डील का मूल्यांकन लगभग 70,000 करोड़ रुपये किया गया है, जिससे यह भारत के इतिहास में सबसे बड़ी पनडुब्बी खरीद में से एक बनती है। वार्ता के अंतिम चरण में प्रवेश करने के संकेत मिलने के बाद, दोनों पक्षों के बीच उच्च‑स्तरीय मुलाक़ात की संभावना बढ़ गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने पहले भी जर्मनी के साथ पनडुब्बी तकनीक में सहयोग किया है, जैसे 2015 में 1,500 मीटर गहराई तक डाइव कर सकने वाली डॉल्फ़िन‑क्लास पनडुब्बी के निर्माण की योजना। हालांकि, वित्तीय बाधाओं और तकनीकी चुनौतियों के कारण कई परियोजनाएँ विलंबित रही हैं। इस नई डील को उन चुनौतियों को पार करने की उम्मीद है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह डील भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी, साथ ही जर्मनी के साथ रक्षा सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।

"यह डील न केवल भारत की पनडुब्बी क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि एशिया‑पैसिफिक में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगी," कहा रक्षा विशेषज्ञ प्रो. अजय सिंह।
क्या आप जानते हैं?: भारत ने 2020 में पहले ही 3,000 करोड़ रुपये की पनडुब्बी कार्यक्रम की घोषणा की थी, लेकिन वह अभी तक पूरी नहीं हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: इस डील में किन प्रकार की पनडुब्बियों का निर्माण होगा?
उत्तर: परम्परागत (डिज़ल‑पावर्ड) पनडुब्बियाँ, जो उन्नत सेंसर्स और टॉरपीडो सिस्टम से लैस होंगी।

प्रश्न 2: डील के अंतिम चरण कब तक पूरा होने की संभावना है?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो‑तीन महीनों में औपचारिक समझौता हो सकता है।